बिहार के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन ने RJD सांसद सुधाकर सिंह को भेजा मानहानि नोटिस, 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
पटना: बिहार के वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह के बीच कानूनी विवाद सामने आया है। कुंदन कृष्णन ने सांसद को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में 15 दिनों के भीतर माफी मांगने और 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
कुंदन कृष्णन की ओर से उनके अधिवक्ता अपूर्व हर्ष ने यह नोटिस जारी किया है। विवाद का संबंध भोजपुर जिले के बिलौती गांव में हुए पुलिस ऑपरेशन और उससे जुड़े कथित आरोपों से बताया जा रहा है।
बिलौती गांव में पुलिस ऑपरेशन से जुड़ा मामला
नोटिस के मुताबिक, 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौती गांव में पुलिस ऑपरेशन हुआ था। इस घटना को लेकर लगाए गए आरोपों और सार्वजनिक बयानों पर विवाद खड़ा हुआ है।
नोटिस में कहा गया है कि बिहार सरकार ने 20 जून 2026 को मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। इस आयोग का गठन घटना से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए किया गया था।
सुधाकर सिंह से 15 दिनों में माफी की मांग
कानूनी नोटिस में सुधाकर सिंह से कथित तौर पर लगाए गए आरोपों को लेकर 15 दिनों के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में जमीन माफिया और शराब माफिया को संरक्षण देने के साथ कथित फर्जी एनकाउंटर से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख है।
कुंदन कृष्णन की ओर से इन आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नोटिस में 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग का भी जिक्र है।
न्यायिक जांच आयोग का भी उल्लेख
इस विवाद में न्यायिक जांच आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नोटिस में आयोग के गठन का उल्लेख करते हुए घटना की जांच की प्रक्रिया की ओर ध्यान दिलाया गया है। हालांकि, आयोग की जांच के अंतिम निष्कर्षों के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई पुष्टि नहीं है।
इसलिए पुलिस ऑपरेशन से जुड़े आरोपों और उनके पीछे की परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
अब सांसद के जवाब पर नजर
कुंदन कृष्णन की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद अब सुधाकर सिंह के जवाब पर नजर रहेगी। नोटिस में निर्धारित समय के भीतर माफी और हर्जाने की मांग पूरी नहीं होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
फिलहाल, यह मामला कानूनी नोटिस और आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है। मानहानि के दावे या नोटिस में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी पक्ष की गलती साबित नहीं करते। मामले की आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।