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Nana Patekar Death: 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में 60 दिन देश के लिए रहे तैनात

By aonenewstv | Published: Oct 08, 2026 08:53 AM

नाना पाटेकर का निधन: 75 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, कारगिल युद्ध में 60 दिन जवानों के साथ रहे

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। सीने में तेज दर्द के बाद वह बेहोश मिले थे। मेडिकल टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की और इसके बाद मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था और करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया।

फिल्मों से अलग भी थी नाना पाटेकर की पहचान

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई दमदार भूमिकाएं निभाईं। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

करीब पांच दशक के करियर में नाना पाटेकर ने गंभीर, सामाजिक और कॉमेडी से लेकर अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

कारगिल युद्ध के दौरान 60 दिन जवानों के साथ रहे

नाना पाटेकर का भारतीय सेना से जुड़ाव भी काफी खास रहा। 1991 की फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के लिए उन्होंने सेना के जवानों के साथ कठोर सैन्य प्रशिक्षण लिया था। बाद में उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक भी मिली।

1999 में जब कारगिल युद्ध चल रहा था, तब नाना पाटेकर ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर युद्ध क्षेत्र में जाने की इच्छा जताई। अनुमति मिलने के बाद वह करीब 60 दिनों तक सेना के जवानों के साथ रहे। उन्होंने द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामुला और सोपोर जैसे इलाकों की यात्रा की और सेना की क्विक रिएक्शन टीम से भी जुड़े रहे।

युद्ध के दौरान 20 किलो वजन हुआ कम

नाना पाटेकर ने बाद में एक इंटरव्यू में कारगिल के अनुभवों को याद करते हुए बताया था कि युद्ध क्षेत्र में रहने के दौरान उनका वजन करीब 20 किलो तक कम हो गया था। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने श्रीनगर के एक सैन्य अस्पताल में भी कुछ समय काम किया था, जहां घायल और शहीद जवानों से जुड़े बेहद भावुक अनुभवों का सामना किया।

उनका सेना से यह रिश्ता सिर्फ फिल्मों में निभाए किरदारों तक सीमित नहीं था। सेना और जवानों के प्रति उनका सम्मान कई मौकों पर सामने आया और कारगिल युद्ध का उनका अनुभव उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया।

भारतीय सिनेमा को बड़ी क्षति

नाना पाटेकर की आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई। उनके निधन को हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक जताया। प्रधानमंत्री ने उन्हें बहुमुखी प्रतिभा और रचनात्मकता से भरपूर कलाकार बताते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

नाना पाटेकर अपने पीछे पत्नी और बेटे को छोड़ गए हैं। उनके निधन से फिल्म जगत ने एक ऐसा कलाकार खो दिया, जिसकी दमदार अदाकारी और सामाजिक सरोकारों की छाप लंबे समय तक याद की जाएगी।

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