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नाना पाटेकर निधन: 75 साल की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट से मौत, खेती से था खास लगाव

By aonenewstv | Published: Oct 08, 2026 04:58 AM

नाना पाटेकर निधन: 75 साल की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट से मौत, खेती से था खास लगाव

मुंबई/गोवा। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें बेहोशी की हालत में मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के अनुसार उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।

नाना पाटेकर को उनके दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और कड़क आवाज के लिए जाना जाता था। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार किरदार निभाए। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ समेत कई फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उन्हें 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

सीने में दर्द के बाद बिगड़ी तबीयत

रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुवार तड़के नाना पाटेकर ने एक दोस्त को असहज महसूस होने और सीने के बाईं ओर दर्द की जानकारी दी थी। इसके बाद दोस्त उनके गोवा स्थित घर पहुंचा। उनकी हालत गंभीर देखकर केयरटेकर को सूचना दी गई और एंबुलेंस बुलाई गई। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया।

अस्पताल से जुड़ी जानकारी के मुताबिक उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के बाद हुई। मृत्यु के मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किए जाने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुणे के पास फार्म हाउस में करते थे खेती

नाना पाटेकर का खेती और ग्रामीण जीवन से भी गहरा जुड़ाव था। पुणे के पास स्थित उनके फार्म हाउस पर वह समय बिताते थे और खेती भी करते थे। रिपोर्टों में बताया गया है कि फार्म हाउस की जमीन के बड़े हिस्से में गेहूं, चना और धान जैसी फसलों की खेती की जाती थी।

खेती से मिलने वाली उपज को लेकर भी नाना पाटेकर का नजरिया आम फिल्मी सितारों से अलग था। वह किसानों और ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे और जरूरतमंद किसानों की मदद से जुड़े सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए किसानों के लिए उनके सामाजिक काम और नाम फाउंडेशन से जुड़े योगदान को याद किया।

चार दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में विश्वनाथ पाटेकर के रूप में हुआ था। उन्होंने मराठी थिएटर से शुरुआत की और 1978 की फिल्म ‘गमन’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने समानांतर सिनेमा से लेकर मुख्यधारा की बॉलीवुड फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाई।

उनकी अभिनय क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। उनके अभिनय, संवाद शैली और सामाजिक सरोकारों के कारण उन्हें भारतीय सिनेमा की एक अलग पहचान रखने वाली शख्सियत के रूप में याद किया जा रहा है।

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