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श्री रामलीला महोत्सव 2026: सीता हरण, जटायु मोक्ष और हनुमान मिलन की लीला

By aonenewstv | Published: Oct 15, 2026 04:35 AM

श्री रामलीला महोत्सव 2026 में सीता हरण, जटायु मोक्ष और हनुमान मिलन की मनोहारी लीला का मंचन

जीटी रोड स्थित रामलीला भवन में श्रद्धालुओं ने किया प्रभु श्रीराम की लीलाओं का दर्शन, 15 अक्टूबर को निकलेगी हनुमान जी की सवारी

जीटी रोड स्थित रामलीला भवन में श्री रामलीला गौशाला कमेटी के तत्वावधान में श्री रामलीला महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव में सर्वोदय गणेश रामलीला मंडल, मथुरा द्वारा आचार्य राजीव चतुर्वेदी के निर्देशन में कथा व्यास गौतम चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। 14 अक्टूबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में सीता हरण, जटायु मोक्ष, शबरी मिलन, हनुमान मिलन और सुग्रीव मित्रता की मनोहारी लीलाओं का मंचन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इन लीलाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, त्याग, करुणा, मित्रता और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।

रावण ने साधु का वेश धारण कर किया सीता हरण

रामलीला में दिखाया गया कि शूर्पणखा अपने भाई लंकापति रावण के पास पहुंचकर अपने अपमान का पूरा वृत्तांत सुनाती है। इससे क्रोधित होकर रावण मारीच के पास जाता है और उसे मायावी स्वर्ण मृग का रूप धारण करके पंचवटी जाने के लिए कहता है।

मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। मृग को देखकर माता सीता भगवान श्रीराम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह करती हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम मृग के पीछे वन में जाते हैं। भगवान श्रीराम के बाण से घायल होने पर मारीच उनकी आवाज में पुकार लगाता है।

आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को प्रभु श्रीराम की सहायता के लिए भेजती हैं। जाने से पहले लक्ष्मण माता सीता को लक्ष्मण रेखा पार न करने की चेतावनी देते हैं। इसके बाद रावण साधु का वेश धारण कर वहां पहुंचता है और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है।

माता सीता की रक्षा के लिए जटायु ने किया रावण से युद्ध

माता सीता का हरण करके ले जा रहे रावण को देखकर पक्षीराज जटायु उन्हें बचाने के लिए युद्ध करते हैं। जटायु पूरी शक्ति से रावण का सामना करते हैं, लेकिन रावण उनके पंख काट देता है। जटायु घायल होकर धरती पर गिर जाते हैं।

उधर, वन से लौटने पर प्रभु श्रीराम माता सीता को आश्रम में नहीं पाते और उनकी खोज में निकल पड़ते हैं। रास्ते में उनकी भेंट घायल जटायु से होती है। जटायु भगवान श्रीराम को माता सीता के हरण की पूरी घटना बताते हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।

इस प्रसंग का मंचन देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कलाकारों ने जटायु के त्याग और माता सीता की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

शबरी मिलन और हनुमान जी से हुई भेंट

माता सीता की खोज में आगे बढ़ते हुए प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट माता शबरी से होती है। शबरी उन्हें आगे का मार्ग बताती हैं, जिसके बाद दोनों भाई पंपा सरोवर की ओर बढ़ते हैं।

पंपा सरोवर के निकट उनकी भेंट हनुमान जी से होती है। हनुमान जी दोनों भाइयों को अपने कंधों पर बैठाकर ऋष्यमूक पर्वत पर ले जाते हैं, जहां उनकी मुलाकात सुग्रीव से होती है। इसके बाद भगवान श्रीराम और सुग्रीव एक-दूसरे को अपना वृत्तांत सुनाते हैं और दोनों के बीच मित्रता स्थापित होती है।

इस प्रसंग में मित्रता, विश्वास और धर्म के मार्ग पर साथ चलने का संदेश दिया गया।

रामलीला के दौरान रामचरितमानस की चौपाइयों और दोहों के माध्यम से प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। इसी क्रम में यह दोहा सुनाया गया—

“आगें चले बहुरि रघुराया।
रिष्यमूक पर्बत निअराया॥
तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा।
आवत देखि अतुल बल सींवा॥”

श्रद्धालुओं ने किया प्रभु श्रीराम का पूजन और आरती

कार्यक्रम में प्रभु श्रीराम का पूजन और आरती अनिल अग्रवाल, अरुण कुमार, तरुण कुमार, पवन जिंदल, ऋषि मित्तल, अखिल मांगलिक अग्रवाल और संजय कृष्ण गुप्ता ने संयुक्त रूप से की।

इस अवसर पर श्री रामलीला गौशाला कमेटी के अध्यक्ष विमल अग्रवाल, सचिव अरविंद अग्रवाल, एडवोकेट टी.एन. मित्तल (कोषाध्यक्ष), संयोजक अन्नू बीड़ी, ऋषभ गर्ग, विक्रांत गर्ग, संयम पाराशर, आकाश अग्रवाल, सीए पीयूष अग्रवाल, राजेश गर्ग, अर्जुन गोविल, भव्य अग्रवाल, पवन अग्रवाल, प्रदीप उपाध्याय, अभिनव वार्ष्णेय, शिखर अग्रवाल मीरा, शिवम वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, दिव्यम, डॉ. हर्ष गुप्ता और कमल अरोड़ा सहित रामलीला एवं महोत्सव समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

15 अक्टूबर को निकलेगी हनुमान जी की सवारी

श्री रामलीला महोत्सव के अंतर्गत 15 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे हनुमान जी की सवारी निकाली जाएगी। यह सवारी महावीर गंज स्थित बड़े हनुमान जी के मंदिर से प्रारंभ होगी।

आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं से धार्मिक आयोजन में शामिल होकर भगवान के दर्शन करने और महोत्सव का हिस्सा बनने की अपील की गई है।

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