दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद करने पर DMRC ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, 4,157 ट्रेन ट्रिप चलाने का दावा
नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की चेयरपर्सन डी. तारा ने 10 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। DMRC ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा कि मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया था और निर्धारित ट्रेन ट्रिप में कोई कटौती नहीं हुई। साथ ही, निगम ने कहा कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उसका पक्ष सुने बिना आदेश पारित किया था।
DMRC ने क्या सफाई दी?
DMRC के मुताबिक, 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो नेटवर्क पर कुल 271 ट्रेनें चलाई गईं और शनिवार के निर्धारित समय के अनुसार 4,157 ट्रेन ट्रिप पूरी की गईं। निगम ने दावा किया कि उस दिन मेट्रो परिचालन में ट्रिप की संख्या कम नहीं की गई थी।
DMRC ने बताया कि दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में कुल 303 स्टेशन हैं। दिल्ली पुलिस के निर्देश पर शुरुआत में 57 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। निगम के अनुसार, बाकी 258 स्टेशन यात्रियों के लिए चालू रहे।
14 स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रही
DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रतिबंधित 45 स्टेशनों में से 14 स्टेशनों पर मेट्रो लाइन बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई। इनमें राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, हौज खास, दिल्ली हाट-आईएनए और नेताजी सुभाष प्लेस जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल थे।
निगम के अनुसार, 10 अक्टूबर को रात 10 बजे से इन 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास से संबंधित प्रतिबंध हटा दिए गए। यात्रियों को स्थिति की जानकारी देने के लिए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट और सारथी ऐप के माध्यम से अपडेट जारी किए गए। स्टेशनों और ट्रेनों में घोषणाएं भी की गईं।
सामान्य दिनों के मुकाबले यात्रियों की संख्या घटी
DMRC ने अदालत को बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो से करीब 32 लाख यात्रियों ने सफर किया, जबकि सामान्य तौर पर महीने के दूसरे शनिवार को यह संख्या लगभग 58 लाख रहती है। निगम का कहना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा से परहेज किया, जिससे यात्रियों की संख्या में गिरावट आई।
DMRC ने यह जानकारी अदालत के सामने यह स्पष्ट करने के लिए रखी कि मेट्रो नेटवर्क का अधिकांश हिस्सा चालू था, लेकिन प्रदर्शन के कारण आम लोगों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध जताया जाना था।
9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और दिल्ली आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उन्हें उचित नियमन के साथ चलाने पर जोर दिया था। अदालत ने कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी और यातायात संबंधी सलाह व्यापक रूप से सार्वजनिक करने के निर्देश भी दिए थे।
अवमानना मामले में दाखिल हुआ हलफनामा
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अदालत के निर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने को लेकर अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC चेयरपर्सन डी. तारा का नाम शामिल था।
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बनता हुआ माना और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। इसके बाद DMRC ने अपने हलफनामे में बिना शर्त माफी मांगते हुए अवमानना नोटिस से राहत देने का अनुरोध किया।
फिलहाल, मेट्रो परिचालन और प्रतिबंधों को लेकर DMRC की ओर से दी गई दलीलें अदालत के समक्ष हैं। अवमानना के आरोपों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।