कैसे बिगड़ा नीरज शेखर का राजनीतिक खेल? बीजेपी ने नहीं दिया राज्यसभा टिकट, 37 साल बाद संसद से बाहर होगा शेखर परिवार
भारतीय राजनीति में ‘युवा तुर्क’ के नाम से मशहूर रहे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का परिवार अब संसद से बाहर होने जा रहा है। उनके छोटे बेटे और तीन बार के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर को भारतीय जनता पार्टी ने इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं दिया है। बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए जिन आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें नीरज शेखर का नाम शामिल नहीं है।
तीन बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं नीरज शेखर
नीरज शेखर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के छोटे बेटे हैं। पिता के निधन के बाद 2007 में हुए लोकसभा उपचुनाव में उन्होंने बलिया से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद वे राज्यसभा पहुंचे।
नीरज शेखर समाजवादी पार्टी के टिकट पर एक बार और बीजेपी के टिकट पर दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्होंने जुलाई 2019 में बीजेपी का दामन थामा था। इससे पहले वह समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे।
बीजेपी ने सभी मौजूदा राज्यसभा सांसदों के टिकट काटे
उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने इस बार आठ नए चेहरों को मैदान में उतारा है। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है।
खास बात यह है कि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से अपने किसी भी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा टिकट नहीं दिया। नीरज शेखर के अलावा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, अरुण सिंह, बृजलाल, सीमा द्विवेदी और अन्य मौजूदा सांसद भी इस सूची में जगह नहीं बना सके।
पूर्वांचल की राजनीति में रहा है प्रभाव
नीरज शेखर का राजनीतिक आधार मुख्य रूप से पूर्वांचल और बलिया में माना जाता है। उनके पिता चंद्रशेखर बलिया से लंबे समय तक लोकसभा सांसद रहे और इसी सीट ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई।
चंद्रशेखर की राजनीतिक विरासत की वजह से नीरज शेखर को भी पूर्वांचल की राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता रहा है। हालांकि, 2026 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने नए संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया।
37 साल बाद संसद से बाहर होगा शेखर परिवार
नीरज शेखर को राज्यसभा टिकट नहीं मिलने का सबसे बड़ा राजनीतिक असर यह माना जा रहा है कि करीब 37 साल बाद शेखर परिवार का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में मौजूद नहीं होगा।
1989 से किसी न किसी रूप में शेखर परिवार का संसद में प्रतिनिधित्व बना रहा। चंद्रशेखर के बाद उनके बेटे नीरज शेखर ने इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। अब नीरज का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद संसद में इस परिवार की मौजूदगी खत्म हो जाएगी।
बीजेपी के नए चेहरे, 2027 की तैयारी?
बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की नई सूची को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने इस बार नए और संगठन से जुड़े चेहरों को मौका दिया है। सूची में ओबीसी, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के नेताओं के साथ महिला उम्मीदवारों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। ऐसे में बीजेपी की नई सूची को लेकर यह चर्चा तेज है कि पार्टी ने पुराने चेहरों की जगह संगठन, जातीय समीकरण और आगामी विधानसभा चुनाव की जरूरतों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया है।
नीरज शेखर को टिकट न मिलने के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चंद्रशेखर की राजनीतिक विरासत को आगे कौन बढ़ाएगा और बलिया व पूर्वांचल की सियासत में शेखर परिवार की भूमिका आने वाले समय में क्या होगी।