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UP Assembly Elections 2027: SP-Congress Seat Sharing Dispute Intensifies

By aonenewstv | Published: Oct 05, 2026 11:02 AM

UP Assembly Elections 2027: कांग्रेस की 200 सीटों की मांग से बढ़ी हलचल, सपा से सीट बंटवारे पर फंसा पेंच

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अभी सहमति नहीं बन सकी है। कांग्रेस की ओर से 200 विधानसभा सीटों पर दावेदारी की बात सामने आई है, जबकि सपा खेमे से कांग्रेस के लिए करीब 50 सीटों की संख्या सामने आई है। (AajTak)

कांग्रेस की 200 सीटों की मांग

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में कांग्रेस की 200 सीटों की मांग लगभग आधी सीटों पर दावेदारी के बराबर है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 4 अक्टूबर को सीट बंटवारे को लेकर कहा कि 150 सीटों की बात किसने की, उन्होंने तो 200 सीटों की बात की थी। उन्होंने गठबंधन में कांग्रेस के लिए बराबर सम्मान और बराबर हिस्सेदारी की मांग भी दोहराई। (The Economic Times)

कांग्रेस का कहना है कि पार्टी सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। उसका तर्क है कि चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त सीटों पर चुनाव लड़ना जरूरी है।

सपा की ओर से 50 सीटों का संकेत

कांग्रेस की 200 सीटों की मांग के मुकाबले समाजवादी पार्टी के खेमे से करीब 50 सीटों की संख्या सामने आई है। हालांकि, सपा ने आधिकारिक तौर पर सीटों का अंतिम फॉर्मूला घोषित नहीं किया है। (AajTak)

सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस की ज्यादा सीटों की मांग पर सवाल उठाते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के प्रदर्शन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 2024 में 37 लोकसभा सीटें जीती थीं और कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटों की मांग नहीं करनी चाहिए। (The Economic Times)

यही बयान दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बढ़ती खींचतान का संकेत माना जा रहा है।

अखिलेश यादव ने नेताओं को दिया संदेश

सीट बंटवारे को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी बढ़ने के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के नेताओं को सीटों से जुड़े मतभेद सार्वजनिक रूप से नहीं उठाने की सलाह दी।

अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन में कितनी सीटें किस पार्टी को मिलेंगी, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण विपक्षी गठबंधन की जीत है। उन्होंने अपने संदेश में जोर दिया कि “बात सीट की नहीं, जीत की है।” (India Today)

उन्होंने गठबंधन की जीत को लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा से भी जोड़ा। अखिलेश के इस रुख को कांग्रेस के साथ जारी बातचीत के बीच तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

छोटे दल भी कांग्रेस के संपर्क में

इस बीच उत्तर प्रदेश के कई छोटे विपक्षी दल भी कांग्रेस के संपर्क में आ रहे हैं। पिछले दिनों स्वामी प्रसाद मौर्य, संजय चौहान और पंकज निरंजन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है। इनमें कुछ नेता पहले समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं। (India Today)

स्वामी प्रसाद मौर्य करीब एक दर्जन सीटों की मांग कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से उन्हें अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए कहा जा रहा है। (AajTak)

इससे सीट बंटवारे का गणित और जटिल हो गया है, क्योंकि कांग्रेस को पहले सपा से अपने लिए सीटें हासिल करनी हैं और उसके बाद छोटे सहयोगी दलों को भी समायोजित करना होगा।

ओवैसी ने भी गठबंधन का प्रस्ताव रखा

उत्तर प्रदेश के विपक्षी समीकरण में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी चर्चा में है। ओवैसी ने सपा और INDIA गठबंधन के दलों के साथ चुनावी समझ बनाने की इच्छा जताई है।

4 अक्टूबर को श्रावस्ती में ओवैसी ने कहा कि AIMIM गठबंधन या किसी तरह की चुनावी समझ के लिए तैयार है। हालांकि, फिलहाल AIMIM सपा-कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा नहीं है। (AajTak)

2024 के प्रदर्शन का भी दिया जा रहा हवाला

सीट बंटवारे की बातचीत में 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे भी महत्वपूर्ण आधार बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने 37 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को छह सीटों पर जीत मिली थी। मौजूदा 403 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के दो और समाजवादी पार्टी के 101 विधायक हैं। (The New Indian Express)

ऐसे में सपा अपने चुनावी आधार और पिछले प्रदर्शन के आधार पर ज्यादा सीटें अपने पास रखने की स्थिति में है, जबकि कांग्रेस संगठन के विस्तार और अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने के लिए अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।

सीटों पर सहमति कब तक?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस की 200 सीटों की मांग और सपा की संभावित सीट संख्या के बीच समझौता कैसे होगा। दोनों दलों के बीच गठबंधन बनाए रखने की इच्छा जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन सीटों का अंतिम फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सीट बंटवारा विपक्षी गठबंधन के लिए बेहद अहम होगा। कांग्रेस जहां ज्यादा सीटों के साथ अपना संगठन मजबूत करना चाहती है, वहीं अखिलेश यादव की पार्टी का जोर जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों और मजबूत सीटों पर है। (India Today)

ऐसे में आने वाले दिनों में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत और छोटे दलों की भूमिका उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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