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पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामला: हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच, ED के पत्रों से मचा हड़कंप

By aonenewstv | Published: Oct 05, 2026 05:26 AM

पंजाब में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने पंजाब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। मामला वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी कामकाज और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।

ED ने पंजाब DGP को लिखे थे तीन पत्र

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका भी अहम है। ED ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को तीन पत्र भेजे थे। एजेंसी ने कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के संबंध में कार्रवाई की मांग की थी। इन पत्रों में कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों और टेंडर से जुड़े मामलों में लेनदेन तथा प्रभाव के इस्तेमाल जैसे आरोपों का जिक्र किया गया था।

ED ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसने पंजाब पुलिस को कार्रवाई योग्य सामग्री उपलब्ध कराई थी और मामले में गोपनीय FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। एजेंसी का आरोप था कि उपलब्ध जानकारी के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

CMO से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप

मामले में दायर याचिका में पंजाब में बड़े स्तर पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इसमें ‘कैश फॉर ट्रांसफर’, अनुकूल नीतियां हासिल करने के लिए पैसे लेने और सरकारी टेंडर में कथित गड़बड़ियों जैसे आरोप शामिल थे।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ ऐसे लोग सरकारी फैसलों और प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहे थे, जिनके मुख्यमंत्री कार्यालय से करीबी संबंध बताए गए हैं। हाईकोर्ट ने पहले ही इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

CBI ने जांच से इनकार नहीं किया

मामले की सुनवाई के दौरान CBI ने हाईकोर्ट को बताया था कि यदि अदालत उसे जांच सौंपती है तो उसे जांच करने में कोई आपत्ति नहीं होगी। CBI ने कहा था कि अदालत के निर्देश के अनुसार वह मामले की जांच करेगी। इसके बाद हाईकोर्ट की ओर से CBI जांच का रास्ता साफ हुआ।

पंजाब सरकार ने आरोपों पर उठाए सवाल

पंजाब सरकार ने इस मामले में CBI जांच की मांग का विरोध किया था। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ED की ओर से भेजी गई सूचनाओं की जांच पंजाब पुलिस को कानून के अनुसार करनी थी और राज्य सरकार इस मामले को देख रही थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस को ED से मिली सामग्री, आरोपों की प्रकृति और लागू कानूनों की जांच करनी थी। सरकार ने मामले में आगे की स्थिति अदालत के सामने रखने के लिए समय भी मांगा था।

WhatsApp चैट और दस्तावेज भी जांच के दायरे में

ED ने हाईकोर्ट के सामने कथित भ्रष्टाचार से संबंधित WhatsApp चैट और अन्य सामग्री भी पेश की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े बिचौलियों के जरिए सरकारी ट्रांसफर लिस्ट, नीतिगत दस्तावेज और गोपनीय सरकारी फाइलों तक पहुंच बनाई गई और उनमें कथित तौर पर हेरफेर किया गया।

अब CBI जांच में इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल होगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित भ्रष्टाचार में कौन-कौन लोग शामिल थे, सरकारी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश हुई या नहीं और ED की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

राजनीतिक असर भी बढ़ सकता है

हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के बाद पंजाब की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल पहले से ही मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर इन आरोपों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से इन आरोपों और जांच को लेकर अपना पक्ष रखा जाता रहा है।

फिलहाल CBI जांच शुरू होने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज, बयान और अन्य सबूत यह तय करेंगे कि कथित भ्रष्टाचार के आरोपों में आगे आपराधिक कार्रवाई का आधार बनता है या नहीं।

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