उत्तर प्रदेश में यूपी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर मंथन कर रही हैं। नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और इससे पहले दोनों खेमे अपने पत्ते खोल सकते हैं। 16 अक्टूबर को मतदान होना है।
बीजेपी और सपा ने खरीदे अतिरिक्त नामांकन पत्र
राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों की रणनीति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि समाजवादी पार्टी ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की ओर से नौ पर्चे खरीदे गए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों दल अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने का विकल्प खुला रखे हुए हैं।
अगर अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं तो राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। वहीं, अगर अतिरिक्त प्रत्याशी नहीं उतारे गए तो सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा सकते हैं।
सपा के दो उम्मीदवार पहले ही मैदान में
समाजवादी पार्टी ने पहले ही वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों नामांकन दाखिल कर चुके हैं। सपा की विधानसभा में संख्या के आधार पर इन दोनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि, सपा तीसरी सीट के लिए भी दांव लगाने की तैयारी में है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभी तक तीसरे उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी बीजेपी की रणनीति सामने आने का इंतजार कर रही है और नामांकन के आखिरी दिन अपना तीसरा प्रत्याशी उतार सकती है।
बीजेपी के पत्ते भी अभी बंद
दूसरी तरफ बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम चर्चा में है। बीजेपी के सामने सवाल यह है कि वह सात उम्मीदवार उतारकर सुरक्षित खेलेगी या आठवें उम्मीदवार के जरिए अतिरिक्त सीट पर भी दांव लगाएगी।
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास सात सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। वहीं आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह सपा अपने दो उम्मीदवारों की जीत के बाद बचने वाले वोटों के सहारे तीसरी सीट पर दांव लगाने की कोशिश कर रही है।
तीसरी सीट पर क्रॉस वोटिंग का खतरा
इस चुनाव में सबसे बड़ा खेल क्रॉस वोटिंग का हो सकता है। सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद अतिरिक्त वोट बचेंगे। पार्टी तीसरे प्रत्याशी के लिए इन वोटों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ एनडीए के कुछ विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है।
वहीं, बीजेपी भी अपनी अतिरिक्त सीट के लिए विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है। दोनों खेमों के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी।
क्या है सीटों का गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल 397 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट के लिए प्रथम वरीयता के करीब 38 वोटों की जरूरत बताई जा रही है। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन दो सीटें आसानी से जीत सकता है।
यही वजह है कि 10वीं सीट पर मुकाबला सबसे महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों पक्ष अतिरिक्त उम्मीदवार उतारते हैं तो चुनाव में मतदान और वरीयता मतों की रणनीति निर्णायक भूमिका निभाएगी।
6 अक्टूबर को खत्म होगा नामांकन
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। इसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि चुनाव निर्विरोध होगा या 10वीं सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा। मतदान 16 अक्टूबर को होगा।
यूपी राज्यसभा चुनाव 2026 को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच शक्ति परीक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है। अगर दोनों दल अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो क्रॉस वोटिंग और विधायकों की रणनीतिक भूमिका चुनाव का रुख तय कर सकती है।