डिजिटल अरेस्ट कर 80 वर्षीय महिला डॉक्टर से 58.50 लाख की ठगी, साले-बहनोई गिरफ्तार
राजकोट: गुजरात के राजकोट में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां 80 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 58.50 लाख रुपये ठग लिए। मामले की जांच के दौरान राजकोट साइबर क्राइम पुलिस ने अहमदाबाद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी आपस में साले-बहनोई बताए जा रहे हैं और अहमदाबाद में कारखाना चलाते हैं।
पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन
जानकारी के मुताबिक, 21 सितंबर को महिला डॉक्टर के पास एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का PSI बताया। उसने महिला से कहा कि मुंबई की एक बैंक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान उनके नाम का आधार कार्ड और एटीएम कार्ड मिला है।
इसके बाद आरोपियों ने महिला को गिरफ्तारी की धमकी दी और कहा कि उम्र को देखते हुए वह घर से बाहर न निकलें। इस तरह उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ जैसा माहौल बनाकर लगातार मानसिक दबाव में रखा गया। बाद में वीडियो कॉल के जरिए खाकी वर्दी पहने एक व्यक्ति से भी बात कराई गई, जिसे कथित तौर पर डीसीपी बताया गया।
चार दिनों तक बनाया दबाव
साइबर ठगों ने महिला को कई दिनों तक अपने निर्देशों के मुताबिक चलने के लिए मजबूर किया। डर और मानसिक दबाव के बीच महिला ने RTGS के जरिए करीब 58.50 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद ठगों ने उनसे करीब 21.50 लाख रुपये और ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। हालांकि, इस बार बैंक कर्मचारियों को महिला की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। महिला डरी हुई नजर आ रही थीं और बड़ी रकम ट्रांसफर करने जा रही थीं। बैंक कर्मचारियों ने साइबर क्राइम पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें ठगी का शिकार होने से बचाया।
6 दिन में खातों में जमा हुए 2.50 करोड़ रुपये
पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर 6 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपनी कंपनी का करंट अकाउंट साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इसी खाते में महिला डॉक्टर से ठगे गए 58.50 लाख रुपये भी जमा कराए गए थे।
जांच में पता चला कि करीब छह दिनों के दौरान इस खाते में देशभर में हुई साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लगभग 2.50 करोड़ रुपये जमा हुए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट प्रोवाइडर’ के रूप में काम कर रहे थे और रकम को आगे मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे।
चार मोबाइल और लैपटॉप बरामद
राजकोट साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों के लेन-देन की जांच के आधार पर अहमदाबाद से दर्शन मकवाना और शुभम परमार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 1.20 लाख रुपये कीमत के चार महंगे मोबाइल फोन और एक डेल कंपनी का लैपटॉप बरामद किया है।
पुलिस अब इस मामले में मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही ठगी की रकम को फ्रीज कराने और बैंक खातों में हुए पूरे लेन-देन की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल केवल इस एक मामले में ही नहीं, बल्कि अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया हो सकता है।
साइबर ठगी से बचाव: पुलिस लगातार लोगों से अपील करती है कि कोई भी व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर किसी को ऑनलाइन हिरासत में रखने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।