Tejas Mk-1A की इंजन सप्लाई समस्या होगी कम, साल के अंत तक मिलेंगे 12 और GE इंजन
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान Tejas Mk-1A कार्यक्रम में लंबे समय से चली आ रही इंजन सप्लाई की समस्या अब धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी कंपनी GE Aerospace की ओर से F404-IN20 इंजनों की आपूर्ति में तेजी आने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच हर महीने चार इंजन मिलने की उम्मीद है, यानी साल के अंत तक 12 और इंजन HAL को मिल सकते हैं।
27 तेजस Mk-1A एयरफ्रेम तैयार
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास Tejas Mk-1A के करीब 27 एयरफ्रेम तैयार हैं। HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के ने बताया था कि कंपनी को GE Aerospace से अब तक 10 F404 इंजन मिल चुके हैं। हालांकि विमान की डिलीवरी के लिए केवल इंजन ही नहीं, बल्कि कुछ तकनीकी परीक्षण और सिस्टम इंटीग्रेशन भी पूरे करना जरूरी है।
अगस्त 2026 में GE Aerospace ने HAL को तीन और F404-IN20 इंजन भेजे थे। इसके बाद कार्यक्रम के तहत मिले इंजनों की संख्या 10 हो गई। इससे लंबे समय से प्रभावित उत्पादन प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
साल के अंत तक 12 और इंजन मिलने की उम्मीद
नए शेड्यूल के अनुसार अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में चार-चार इंजन मिलने की उम्मीद है। इस तरह दिसंबर तक 12 अतिरिक्त इंजन HAL को मिल सकते हैं। इंजन सप्लाई बढ़ने से पहले से तैयार एयरफ्रेम को इंजन से लैस करने और आगे के परीक्षणों को गति देने में मदद मिल सकती है।
Tejas Mk-1A के लिए GE Aerospace का F404-IN20 इंजन महत्वपूर्ण है। शुरुआती 83 विमानों के कार्यक्रम के लिए 99 इंजनों की आपूर्ति का अनुबंध किया गया था। इंजन की आपूर्ति में देरी लंबे समय तक विमान की डिलीवरी में प्रमुख अड़चन रही।
सिर्फ इंजन नहीं, रडार और हथियार इंटीग्रेशन भी चुनौती
इंजन मिलने के बाद भी Tejas Mk-1A की डिलीवरी तुरंत शुरू नहीं होगी। विमान में AESA रडार, मिसाइल और दूसरे मिशन सिस्टम के इंटीग्रेशन तथा परीक्षण से जुड़े कुछ काम अभी बाकी हैं।
HAL प्रमुख रवि के के मुताबिक, रडार इंटीग्रेशन और मिसाइल से जुड़े कुछ परीक्षणों को पूरा किया जाना है। सितंबर में भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भी कहा था कि विमान के इंडक्शन से पहले कुछ तकनीकी बिंदुओं को साबित करना बाकी है।
रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियार प्रणाली के बीच सही तरीके से तालमेल सुनिश्चित करना विमान को ऑपरेशनल रूप से स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारतीय वायुसेना को 180 Tejas Mk-1A मिलेंगे
भारतीय वायुसेना ने कुल 180 Tejas Mk-1A विमानों के लिए ऑर्डर किया है। शुरुआती अनुबंध में 83 विमान शामिल थे, जबकि बाद में 97 अतिरिक्त विमानों का ऑर्डर दिया गया। इससे Mk-1A का कुल ऑर्डर 180 विमानों तक पहुंच गया।
HAL ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है। कंपनी की योजना तीन उत्पादन लाइनों के जरिए सालाना करीब 24 विमान बनाने की क्षमता हासिल करने की है। हालांकि उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इंजन और अन्य सिस्टम की समय पर उपलब्धता भी जरूरी है।
आगे भी GE इंजन की जरूरत
Tejas Mk-1A कार्यक्रम में इंजन सप्लाई का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमान का उत्पादन और अंतिम डिलीवरी इंजन की उपलब्धता से सीधे जुड़ी है। हालिया आपूर्ति से स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन आगे की डिलीवरी GE Aerospace की आपूर्ति गति पर निर्भर रहेगी।
भारतीय वायुसेना ने भी स्पष्ट किया है कि विमान को शामिल करने से पहले जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल मानकों को पूरा करना होगा। ऐसे में इंजन मिलने के साथ-साथ रडार, मिसाइल और अन्य सिस्टम से जुड़े परीक्षणों को पूरा करना भी जरूरी है।