झांसी BA छात्रा मौत मामले में बड़ा खुलासा, दो नाबालिग हिरासत में
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी के गुरसरांय इलाके में बीए की छात्रा की जहरीला पदार्थ खाने से हुई मौत के मामले में पुलिस जांच में नया खुलासा हुआ है। शुरुआती तौर पर परिजनों ने कई युवकों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस की अब तक की जांच में गैंगरेप की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने मामले में दो नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया है, जबकि नामजद अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
22 सितंबर को अस्पताल से मिली थी सूचना
पुलिस के मुताबिक, 22 सितंबर 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय से सूचना मिली थी कि एक छात्रा ने जहरीला पदार्थ खा लिया है। अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और घटनास्थल के साथ-साथ आरोपियों से पूछताछ तथा तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।
फ्री फायर खेलने निकले थे दो नाबालिग
जांच में पुलिस के सामने आया कि 20 सितंबर को दो नाबालिग युवक मोबाइल पर फ्री फायर गेम खेलने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात छात्रा से हुई। पुलिस के अनुसार, छात्रा और एक नाबालिग पहले से एक-दूसरे को जानते थे।
पुलिस का दावा है कि छात्रा और एक नाबालिग सामुदायिक केंद्र के एक कमरे में गए, जबकि दूसरा नाबालिग बाहर निगरानी कर रहा था। पूछताछ में मुख्य नाबालिग ने छात्रा के साथ संबंध बनाने की बात स्वीकार की है।
घटनास्थल से मिला कंडोम, DNA जांच के लिए भेजा
पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच के दौरान एक इस्तेमाल किया हुआ कंडोम बरामद किया है। इसे DNA मिलान के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है। इसके अलावा घटनास्थल से जुटाए गए अन्य साक्ष्यों की भी वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों और मामले से जुड़े लोगों के मोबाइल फोन तथा डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच शुरू की है। अभी तक किसी मोबाइल फोन से घटना से संबंधित वीडियो मिलने की बात सामने नहीं आई है।
पोस्टमार्टम में चोट के निशान नहीं मिले
झांसी के SSP विकास कुमार के मुताबिक, छात्रा के पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान नहीं मिले हैं। मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट करने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा गया है।
पुलिस ने यह भी बताया कि मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की जांच में छात्रा और 16 वर्षीय मुख्य आरोपी के बीच पहले से परिचय होने की जानकारी सामने आई है। दूसरे हिरासत में लिए गए नाबालिग की उम्र 17 वर्ष बताई गई है।
बदनामी के डर से उठाया कदम? पुलिस जांच में यह एंगल भी
पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि घटना की जानकारी गांव में फैलने के बाद छात्रा ने सामाजिक बदनामी के डर से जहरीला पदार्थ तो नहीं खाया। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और वैज्ञानिक तथा तकनीकी जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है।
चार नामजद लोगों की भूमिका की भी जांच
पुलिस ने दो नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया है। वहीं, मामले में नामजद चार अन्य लोगों को फिलहाल क्लीन चिट नहीं दी गई है। पुलिस उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
SSP विकास कुमार के मुताबिक, फोरेंसिक और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। जरूरत पड़ने पर आरोपियों का पॉलीग्राफी टेस्ट भी कराया जा सकता है।