IMEC कॉरिडोर को ट्रंप का खुला समर्थन, भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कनेक्टिविटी पर अमेरिका का जोर
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC को लेकर अमेरिकी प्रशासन के मजबूत समर्थन की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र से इतर GCC और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों ने ऊर्जा और व्यापार के लिए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत को और स्पष्ट किया है।
ट्रंप ने क्यों किया IMEC का समर्थन?
ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व की ऊर्जा व्यवस्था को ईरान से जुड़े संवेदनशील मार्गों से दूर करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, वाणिज्यिक शिपिंग पर हमलों के बाद ऊर्जा और तेल की आवाजाही के लिए वैकल्पिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता बढ़ गई है।
उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि उनका प्रशासन भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) और तेल को बाहर ले जाने वाली अन्य व्यवस्थाओं का समर्थन करता है। ट्रंप ने पाइपलाइन समेत अलग-अलग ऊर्जा परिवहन विकल्पों का भी उल्लेख किया।
GCC और अरब नेताओं के साथ हुई बैठक
ट्रंप ने यह बयान न्यूयॉर्क में UNGA के दौरान GCC और अरब देशों के नेताओं के साथ हुई बैठक में दिया। उन्होंने बैठक में मौजूद नेताओं को अमेरिका के करीबी मित्र, सहयोगी और साझेदार बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि सभी देश मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने के प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र दशकों से चली आ रही चुनौतियों से उबरने के करीब पहुंच रहा है।
क्या है IMEC कॉरिडोर?
IMEC यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor को सितंबर 2023 में भारत में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में सामने लाया गया था। आधिकारिक समझौते के मुताबिक, इसका उद्देश्य एशिया, अरब की खाड़ी और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी और आर्थिक एकीकरण को बढ़ाना है।
इस परियोजना में दो मुख्य हिस्से हैं। पहला ईस्टर्न कॉरिडोर, जो भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ने की योजना है। दूसरा नॉर्दर्न कॉरिडोर, जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ने के लिए प्रस्तावित है।
रेल और समुद्री नेटवर्क से जुड़ेगा कॉरिडोर
IMEC में समुद्री मार्गों के साथ-साथ रेलवे और शिप-टू-रेल ट्रांजिट नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इसके अलावा सड़क परिवहन नेटवर्क को भी इससे जोड़े जाने की परिकल्पना की गई है।
भारत सरकार द्वारा जारी IMEC के समझौता ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित रेलवे नेटवर्क भारत, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजरायल और यूरोप के बीच सामान और सेवाओं की आवाजाही को आसान बनाने में मदद करेगा।
सिर्फ व्यापार नहीं, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी भी
IMEC की योजना केवल माल ढुलाई और व्यापार तक सीमित नहीं है। आधिकारिक समझौते में रेलवे मार्ग के साथ बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए केबल तथा स्वच्छ हाइड्रोजन के निर्यात के लिए पाइपलाइन जैसी सुविधाओं की संभावनाओं का भी उल्लेख है।
इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सप्लाई चेन को मजबूत करना, व्यापार की पहुंच बढ़ाना, परिवहन की दक्षता में सुधार करना और सामान की आवाजाही से जुड़ी लागत को कम करना है।
ईरान और क्षेत्रीय शिपिंग का मुद्दा
ट्रंप का IMEC समर्थन ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं चर्चा में हैं। ट्रंप ने अपने बयान में वाणिज्यिक शिपिंग पर हमलों का हवाला देते हुए मध्य पूर्व की ऊर्जा व्यवस्था के लिए वैकल्पिक मार्गों की जरूरत बताई।
हालांकि, IMEC की मूल योजना 2023 में घोषित हुई थी और इसका दायरा केवल किसी एक मौजूदा क्षेत्रीय संकट तक सीमित नहीं है। आधिकारिक दस्तावेज इसे भारत, खाड़ी और यूरोप के बीच व्यापक आर्थिक एवं कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में परिभाषित करता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है IMEC?
IMEC के जरिए भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप के साथ वैकल्पिक मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी मिलने की परिकल्पना की गई है। समुद्री परिवहन को रेल और सड़क नेटवर्क से जोड़ने से सामान की आवाजाही के लिए अलग-अलग परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
परियोजना के आधिकारिक दस्तावेज में व्यापार सुगमता बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने, रोजगार पैदा करने और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने जैसे संभावित उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है।
ट्रंप का ताजा बयान इस परियोजना को लेकर अमेरिकी प्रशासन के समर्थन को रेखांकित करता है। हालांकि, IMEC को जमीन पर पूरी तरह लागू करने के लिए संबंधित देशों के बीच बुनियादी ढांचे, वित्त, सुरक्षा और क्षेत्रीय परिस्थितियों से जुड़े कई विषयों पर आगे काम जरूरी है।