TGT PGT भर्ती नियमावली को लेकर प्रयागराज में छात्रों का आंदोलन तेज, शिक्षा निदेशालय पहुंचा प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में TGT PGT भर्ती नियमावली को लेकर प्रतियोगी छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर भर्ती कराने की मांग को लेकर छात्रों ने पत्थर गिरजाघर स्थित धरना स्थल से आगे बढ़कर शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। मंगलवार को भी छात्र शिक्षा निदेशालय के बाहर जुटे रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की।
छात्रों का कहना है कि नई नियमावली लागू होने से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं, जो पुरानी व्यवस्था के आधार पर लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनका आरोप है कि पात्रता और परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव के कारण कई अभ्यर्थियों के लिए भर्ती में शामिल होने का अवसर सीमित हो गया है। छात्र सरकार से पुरानी नियमावली बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
5 सितंबर से आमरण अनशन
इस मांग को लेकर कुछ छात्र 5 सितंबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। Aaj Tak की 22 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक चार छात्र रामनामी ओढ़कर अनशन कर रहे हैं और उन्होंने विरोध के तौर पर खुद को मृत मानकर प्रदर्शन किया। लगातार अनशन के चलते अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई है और मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर उनकी जांच की।
छात्रों का कहना है कि जब तक पुरानी नियमावली लागू करने को लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षा निदेशालय पहुंचे सैकड़ों छात्र
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र-छात्राएं पत्थर गिरजाघर से पैदल शिक्षा निदेशालय पहुंचे। यहां पुलिस बल भी तैनात किया गया था। अमर उजाला के मुताबिक छात्रों ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और लंबे समय तक नारेबाजी की। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी मांग पर ठोस निर्णय चाहिए।
छात्रों का कहना है कि उनकी मांग भर्ती प्रक्रिया में पुरानी व्यवस्था को लेकर है और सरकार को नई तथा पुरानी नियमावली के बीच विषयवार अंतर की समीक्षा करनी चाहिए।
नई नियमावली में पात्रता को लेकर विवाद
प्रतियोगी छात्रों के मुताबिक नई व्यवस्था में टीजीटी-पीजीटी भर्ती की पात्रता और परीक्षा प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विषयों में संबंधित विषय की स्नातकोत्तर डिग्री के साथ बीएड की शर्त और हिंदी जैसे विषयों में अतिरिक्त शैक्षिक योग्यता से जुड़े बदलावों को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस है। छात्रों का दावा है कि पुरानी व्यवस्था के तहत पात्र रहे कई उम्मीदवार नई शर्तों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पुरानी नियमावली के आधार पर भर्ती की तैयारी करते रहे हैं। इसलिए उनका आग्रह है कि प्रस्तावित भर्ती में पुरानी व्यवस्था को ही लागू किया जाए।
आंदोलन के दौरान छात्र की मौत से बढ़ा आक्रोश
आंदोलन के बीच प्रतियोगी छात्र विजय बहादुर गौतम की मौत की खबर भी सामने आई है। हिन्दुस्तान और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार, विजय बहादुर आंदोलन में शामिल थे और उनकी मौत के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। छात्रों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और आंदोलन को और तेज करने की बात कही।
छात्र नेताओं ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई है। अमर उजाला के मुताबिक छात्रों ने 20 लाख रुपये की सहायता राशि की मांग रखी है। यह मांग आंदोलनकारियों की ओर से रखी गई है।
अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी
लगातार कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अनशनकारियों की तबीयत खराब हुई और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांग पर कायम रहने की बात कह रहे हैं।
Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, 22 सितंबर तक चार छात्र आमरण अनशन पर थे और मेडिकल टीम ने उनकी स्वास्थ्य जांच की थी।
छात्रों की प्रमुख मांग क्या है?
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:
- TGT-PGT भर्ती पुरानी नियमावली के आधार पर कराई जाए।
- पुराने परीक्षा पैटर्न को लागू किया जाए।
- नई नियमावली से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए पात्रता संबंधी स्थिति स्पष्ट की जाए।
- पुरानी और नई नियमावली के बीच विषयवार अंतर की समीक्षा की जाए।
- सरकार की ओर से मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय लिया जाए।
छात्रों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नियमों में बदलाव के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।
छात्र संगठनों और नेताओं का भी समर्थन
प्रयागराज में चल रहे इस आंदोलन को अलग-अलग छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिला है। इससे पहले AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात कर समर्थन जताया था।
वहीं, जागरण के अनुसार शिक्षक एमएलसी मान सिंह भी प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे और उनकी मांग को आगे रखने का भरोसा दिया।
आगे और बड़ा हो सकता है आंदोलन
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। फिलहाल छात्रों का प्रदर्शन शिक्षा निदेशालय और पत्थर गिरजाघर क्षेत्र में केंद्रित है।
प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती नियमावली को लेकर चल रहा विवाद अब लंबे आंदोलन का रूप ले चुका है। एक तरफ छात्र पुरानी नियमावली के आधार पर भर्ती की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ नई व्यवस्था में किए गए बदलावों को लेकर पात्रता और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब निगाहें सरकार और संबंधित शिक्षा विभाग की ओर हैं कि इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है।