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सिस्ल्यूनर स्पेस में जंग की तैयारी? अमेरिका चांद तक सैन्य रणनीति बढ़ाने की कर रहा तैयारी

By yogesh jindoria | Published: Sep 17, 2026 04:10 AM

सिस्ल्यूनर स्पेस में जंग की तैयारी? अमेरिका चांद तक सैन्य रणनीति बढ़ाने की कर रहा तैयारी

वॉशिंगटन। अमेरिका ने अंतरिक्ष में अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर एक बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी सेना के शीर्ष सैन्य सलाहकार और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा है कि अमेरिकी सेना को केवल पृथ्वी की कक्षा तक ही नहीं, बल्कि चांद के आसपास के क्षेत्र यानी सिस्ल्यूनर स्पेस में भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।

जनरल डैन केन ने मैरीलैंड में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में सैन्यकर्मियों और रक्षा उद्योग से जुड़े लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना को समुद्र की गहराई से लेकर सिस्ल्यूनर स्पेस तक भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार रहना होगा। The Washington Post+1

क्या है सिस्ल्यूनर स्पेस?

सिस्ल्यूनर स्पेस से आशय पृथ्वी की ऊंची कक्षाओं से लेकर चांद और उसके आसपास के क्षेत्र तक फैले अंतरिक्ष क्षेत्र से है। जैसे-जैसे इंसान की अंतरिक्ष गतिविधियां पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे इस इलाके का रणनीतिक महत्व भी बढ़ रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में चांद और उसके आसपास अंतरिक्ष यान, संचार प्रणाली, नेविगेशन और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मौजूदगी बढ़ सकती है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सैन्य योजनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

अमेरिका ने क्यों बढ़ाई तैयारी?

अमेरिकी स्पेस फोर्स के कॉम्बैट फोर्सेज कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी गैगनॉन ने कहा कि मानवता अंतरिक्ष में लगातार आगे बढ़ रही है और स्पेस फोर्स की जिम्मेदारी अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए तैयार रहना है।

गैगनॉन ने चीन समेत संभावित प्रतिद्वंद्वियों की अंतरिक्ष गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, अमेरिकी खुफिया समुदाय का आकलन है कि संभावित विरोधी अंतरिक्ष के अलग-अलग हिस्सों में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं और भविष्य में संघर्ष को अंतरिक्ष तक फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। The Independent+1

अंतरिक्ष में हथियारों की मौजूदगी भी स्वीकार

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि उसने पृथ्वी की कक्षा में ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स तैनात किए हैं।

अमेरिकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मेइंक ने इस तैनाती की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने इन हथियारों की संख्या, क्षमता या सटीक तकनीक के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन क्षमताओं का उद्देश्य अंतरिक्ष में अमेरिकी सैन्य प्रणालियों को संभावित खतरों से बचाना और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है। Axios+1

चीन ने जताई आपत्ति

अमेरिका की अंतरिक्ष संबंधी सैन्य तैयारियों पर चीन ने प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन हमेशा बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का समर्थन करता है और अंतरिक्ष के हथियारीकरण, सैन्यीकरण तथा हथियारों की होड़ का विरोध करता है।

चीन ने अमेरिका से अंतरिक्ष में अपनी सैन्य तैयारियों का विस्तार रोकने की अपील भी की है। बीजिंग का कहना है कि अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती वैश्विक रणनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है और हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकती है। Reuters

1967 की अंतरिक्ष संधि का क्या है नियम?

अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियों को लेकर 1967 की Outer Space Treaty महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है। अमेरिका और चीन दोनों इस संधि के पक्षकार हैं। संधि में चांद और अन्य खगोलीय पिंडों के इस्तेमाल को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जोड़ते हुए परमाणु हथियारों और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों को पृथ्वी की कक्षा में रखने पर रोक लगाई गई है। The Washington Post+1

हालांकि, संधि पारंपरिक हथियारों से जुड़ी सभी संभावित गतिविधियों पर उसी तरह स्पष्ट प्रतिबंध नहीं लगाती। इसी वजह से अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताओं के बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा को लेकर बहस भी तेज हो रही है।

चांद के आसपास क्यों बढ़ रही रणनीतिक दिलचस्पी?

चांद तक पहुंचने की कोशिश अब केवल वैज्ञानिक या अंतरिक्ष अन्वेषण तक सीमित नहीं है। कई देश चंद्रमा और उसके आसपास लंबे समय तक गतिविधियां बढ़ाने की योजनाएं बना रहे हैं। ऐसे में सिस्ल्यूनर क्षेत्र भविष्य में संचार, नेविगेशन, लॉजिस्टिक्स और अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है

अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि जैसे-जैसे अंतरिक्ष में गतिविधियां बढ़ेंगी, वहां मौजूद अमेरिकी और सहयोगी प्रणालियों की सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ेगी। इसी संदर्भ में अमेरिकी स्पेस फोर्स अपनी क्षमताओं और तैयारी को पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। AP News

स्पेस फोर्स का विस्तार

अमेरिकी स्पेस फोर्स की स्थापना 2019 में हुई थी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यह बल अगले कुछ वर्षों में अपने आकार को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है और अंतरिक्ष में संभावित संघर्ष की स्थिति के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित कर रहा है। AP News

अमेरिकी अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि भविष्य की सैन्य योजना में पृथ्वी के आसपास का अंतरिक्ष ही नहीं, बल्कि चांद तक फैला क्षेत्र भी शामिल किया जा रहा है।

क्या अभी चांद पर युद्ध की स्थिति है?

अमेरिकी अधिकारियों के बयानों का अर्थ यह नहीं है कि चांद के आसपास तत्काल सैन्य संघर्ष शुरू होने वाला है। उनका जोर संभावित भविष्य के संघर्ष के लिए तैयारी और अंतरिक्ष में अमेरिकी हितों की सुरक्षा पर है।

फिलहाल अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती और सिस्ल्यूनर क्षेत्र में सैन्य तैयारी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बयानबाजी बढ़ी है। आने वाले वर्षों में चांद और उसके आसपास अंतरिक्ष गतिविधियां बढ़ने के साथ इस क्षेत्र की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर बहस और महत्वपूर्ण हो सकती है।

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