घर में सीलन दीमक से बचाव: निर्माण के समय इन केमिकल्स से रोकें दीमक, क्रैक और सीलन की समस्या
घर बनाते समय सिर्फ मजबूत ईंट, सीमेंट और सरिया का इस्तेमाल करना ही पर्याप्त नहीं होता। अगर निर्माण के दौरान सही तरीके से एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट, वाटरप्रूफिंग और क्रैक प्रिवेंशन का ध्यान नहीं रखा जाए तो कुछ समय बाद दीवारों में सीलन, दीमक, प्लास्टर में दरार और पानी रिसने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इनकी मरम्मत में बाद में काफी पैसा खर्च हो सकता है।
निर्माण के समय ही कुछ जरूरी केमिकल्स और ट्रीटमेंट का इस्तेमाल करके इन समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
नींव में एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट जरूरी
दीमक से बचाव के लिए घर की नींव और जमीन के संपर्क वाले हिस्सों में एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट किया जाता है। इसका उद्देश्य मिट्टी से घर के स्ट्रक्चर में दीमक के प्रवेश की संभावना को कम करना होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घर का निर्माण शुरू होने से पहले ही नींव के आसपास उचित एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल और उनकी मात्रा का निर्धारण निर्माण की स्थिति और संबंधित उत्पाद के निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए।
वाटरप्रूफिंग के लिए लिक्विड एडमिक्सचर
घर में सीलन और पानी के रिसाव से बचाव के लिए निर्माण के दौरान वॉटरप्रूफिंग लिक्विड एडमिक्सचर का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सीमेंट-कंक्रीट या प्लास्टर के साथ मिलाया जाता है।
इस तरह के एडमिक्सचर का इस्तेमाल उन हिस्सों में किया जा सकता है जहां नमी और पानी के संपर्क की संभावना ज्यादा होती है। बाजार में अलग-अलग कंपनियों के वॉटरप्रूफिंग एडमिक्सचर उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर फिक्सिट पीडिप्रूफ और सिका लेटेक्स सुपर जैसे उत्पादों का इस्तेमाल निर्माण और रिपेयरिंग के काम में किया जाता है।
प्लास्टर में दरार रोकने पर भी दें ध्यान
दीवारों में दरार आने की एक वजह निर्माण सामग्री और सतह की तैयारी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। प्लास्टर करने से पहले सतह की उचित तैयारी, सही अनुपात में सामग्री का इस्तेमाल और पर्याप्त curing जरूरी है।
जहां जरूरत हो, वहां उपयुक्त बॉन्डिंग एजेंट या अन्य निर्माण केमिकल का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी केमिकल का इस्तेमाल केवल उसके निर्माता के निर्देश और इंजीनियर या निर्माण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
छत और बाथरूम में वाटरप्रूफिंग जरूरी
घर में सीलन की समस्या अक्सर छत, बाथरूम, बालकनी और पानी वाली पाइपलाइन के आसपास देखने को मिलती है। इन जगहों पर निर्माण के दौरान ही वाटरप्रूफिंग सिस्टम तैयार करना बेहतर रहता है।
छत पर सही ढलान, जल निकासी और वाटरप्रूफिंग लेयर का ध्यान रखना चाहिए। बाथरूम में भी फर्श और दीवारों के निचले हिस्से में उचित वाटरप्रूफिंग से बाद में होने वाले रिसाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
सस्ता विकल्प चुनने के बजाय सही केमिकल चुनें
घर बनाने में इस्तेमाल होने वाले निर्माण केमिकल्स में सिर्फ कीमत देखकर चुनाव करना उचित नहीं है। अलग-अलग उत्पाद अलग परिस्थितियों के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए नींव, प्लास्टर, कंक्रीट, छत और बाथरूम के लिए उपयुक्त उत्पाद का चुनाव करना जरूरी है।
साथ ही, केमिकल की मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है। जरूरत से ज्यादा या कम मात्रा में इस्तेमाल करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकता।
निर्माण के समय खर्च, बाद की मरम्मत से बचा सकता है पैसा
घर बनने के बाद दीमक, सीलन या प्लास्टर की दरार ठीक कराने में बार-बार खर्च करना पड़ सकता है। कई बार समस्या दीवार के अंदर या नींव तक पहुंच जाने पर मरम्मत भी मुश्किल हो जाती है।
इसलिए घर बनाते समय ही एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट, वाटरप्रूफिंग और सही प्लास्टर प्रक्रिया पर ध्यान देना लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, किसी भी निर्माण केमिकल का इस्तेमाल साइट की स्थिति और तकनीकी सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।