AI ट्रेनिंग के लिए काम की रिकॉर्डिंग: बार्बर और फैक्ट्री कर्मचारियों के वीडियो से सिखाई जा रही मशीनों को इंसानी स्किल
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ ऑफिस, स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं है। तकनीक अब इंसानों के रोजमर्रा के शारीरिक कामों को भी समझने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में बार्बर से लेकर फैक्ट्री और रीसाइक्लिंग का काम करने वाले लोगों की गतिविधियों को कैमरे के जरिए रिकॉर्ड किए जाने की चर्चा सामने आई है। इन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल AI और रोबोटिक सिस्टम को इंसानी गतिविधियां समझाने के लिए किया जा सकता है।
कैमरा लगाकर बार्बर की हर गतिविधि रिकॉर्ड
हाल ही में उद्योगपति हर्ष गोयनका ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एक बार्बर ग्राहक की शेविंग करते समय सिर पर कैमरा और शरीर पर मोशन-कैप्चर उपकरण लगाए नजर आया। उसके हाथों, शरीर की स्थिति और काम करने के तरीके को रिकॉर्ड किया जा रहा था।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस तरह का डेटा भविष्य में AI या रोबोटिक सिस्टम को जटिल शारीरिक काम सीखने में मदद कर सकता है। हालांकि, इस वीडियो से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बार्बर की नौकरी तत्काल किसी मशीन से बदली जा रही है।
इंसानों से सीख रही मशीनें
AI को आमतौर पर कंप्यूटर, कोडिंग और डेटा से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब फिजिकल AI और रोबोटिक्स के क्षेत्र में इंसानों की गतिविधियों का डेटा भी महत्वपूर्ण हो रहा है।
जब कोई व्यक्ति किसी काम को कैमरे के सामने करता है तो रिकॉर्डिंग से मशीन को यह समझने में मदद मिल सकती है कि हाथ किस दिशा में चलता है, किसी वस्तु को कैसे पकड़ा जाता है और किसी काम को पूरा करने के लिए शरीर की कौन-कौन सी गतिविधियां होती हैं।
इस तरह के डेटा का इस्तेमाल भविष्य में मशीनों को वास्तविक दुनिया के कामों से जुड़े प्रशिक्षण में किया जा सकता है।
रीसाइक्लिंग का काम करने वाली महिला भी रिकॉर्ड कर रहीं गतिविधियां
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुछ लोग AI ट्रेनिंग के लिए अपने काम की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं। इनमें सुनीता राठौर का उदाहरण दिया गया है, जो सिर पर iPhone लगाकर रीसाइक्लिंग का काम रिकॉर्ड करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें इसके लिए करीब 150 रुपये प्रति घंटे अतिरिक्त मिलते हैं। उनके काम में सामान से लेबल हटाना, कचरे को अलग करना और बोरियों को व्यवस्थित करना जैसे काम शामिल हैं।
फैक्ट्री और दूसरे कामों की भी रिकॉर्डिंग
AI ट्रेनिंग के लिए केवल बार्बर या रीसाइक्लिंग वर्कर ही नहीं, बल्कि फैक्ट्री, वेयरहाउस, खेत और दूसरे कामों से जुड़ी मानवीय गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किए जाने की चर्चा है।
कुछ वायरल वीडियो में भारतीय फैक्ट्री कर्मचारियों के सिर पर कैमरे लगे दिखाई दिए थे। इन वीडियो के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि क्या कर्मचारियों की गतिविधियां AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए रिकॉर्ड की जा रही हैं। हालांकि, किसी खास वीडियो के पीछे का उद्देश्य हमेशा स्पष्ट या स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ है।
रोजमर्रा के काम भी बन रहे हैं AI डेटा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि AI ट्रेनिंग के लिए लोगों के रोजमर्रा के कामों की रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। इनमें फल काटना और फूलों की माला बनाना जैसे काम शामिल हैं।
कुछ लोगों को ऐसी रिकॉर्डिंग के लिए करीब 250 रुपये प्रति घंटे तक मिलने की बात सामने आई है। इस तरह के वीडियो में कैमरे से व्यक्ति का पहला दृष्टिकोण यानी वह जो देख रहा है और जिस तरह से हाथों से काम कर रहा है, दोनों रिकॉर्ड हो सकते हैं।
अतिरिक्त कमाई के साथ भविष्य की चिंता
अपने काम की रिकॉर्डिंग करने वाले लोगों के लिए फिलहाल यह अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है। लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि अगर मशीनें इंसानों के काम करने का तरीका सीख लें तो भविष्य में इन कामों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
हालांकि, किसी व्यक्ति का अपना काम रिकॉर्ड