रामगढ़ रेलवे रिश्वत मामला: CBI को देखकर नोट फेंकने वाले दो रेलवे अधिकारियों को 3-3 साल की सजा
रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में रिश्वतखोरी के करीब आठ साल पुराने मामले में रांची की विशेष CBI अदालत ने रेलवे के दो पूर्व अधिकारियों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों अधिकारियों पर पतरातू डीजल शेड में एक ठेकेदार के बकाया बिल का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था। अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
6.26 लाख रुपये के बिल के बदले मांगी थी रिश्वत
मामला वर्ष 2018 का है। पूर्व मध्य रेलवे के पतरातू डीजल शेड में रेलवे को सामग्री की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार नरेश कुमार सिंह का करीब 6.26 लाख रुपये का बिल भुगतान के लिए लंबित था।
CBI के अनुसार, बिल पास कराने के बदले तत्कालीन असिस्टेंट मैटेरियल मैनेजर कैलाश कांत झा ने 17 हजार रुपये और तत्कालीन सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर राजेश्वरी सिंह ने 45 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। यानी दोनों अधिकारियों के लिए कुल 62 हजार रुपये की रकम तय होने का आरोप था।
ठेकेदार की शिकायत पर CBI ने बिछाया जाल
रिश्वत की मांग से परेशान ठेकेदार ने CBI से शिकायत की। इसके बाद जांच एजेंसी ने शिकायत का सत्यापन किया और दोनों अधिकारियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप की कार्रवाई की।
अगस्त 2018 में CBI टीम स्वतंत्र गवाहों के साथ पतरातू डीजल शेड पहुंची। योजना के अनुसार ठेकेदार ने अधिकारियों को रिश्वत की रकम दी। जैसे ही CBI टीम ने मौके पर पहुंचकर अपनी पहचान बताई, दोनों अधिकारियों ने कथित तौर पर पैसे लेने से इनकार करते हुए रकम को इधर-उधर फेंक दिया।
CBI को देखते ही फेंक दिए रिश्वत के नोट
CBI के अनुसार, कैलाश कांत झा ने रिश्वत की रकम मेज के पीछे और फर्श पर फेंक दी। वहीं राजेश्वरी सिंह ने अपनी मेज पर रखे पैसे दूर धकेल दिए और रिश्वत लेने से इनकार किया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि अधिकारियों के पास से सीधे रकम बरामद नहीं हुई थी और नोट फर्श से मिले थे। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर इस दलील का विरोध किया।
फिनोलफ्थलीन टेस्ट से सामने आया सबूत
जांच के दौरान रिश्वत की रकम पर फिनोलफ्थलीन पाउडर लगाए जाने की बात सामने आई। अधिकारियों के हाथ और कपड़ों से जुड़े नमूनों की जांच की गई। सोडियम कार्बोनेट के घोल से किए गए परीक्षण में रंग बदलने की बात सामने आई।
कोलकाता की फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट को भी अभियोजन पक्ष ने अहम साक्ष्य के तौर पर पेश किया। इसके अलावा स्वतंत्र गवाहों ने अदालत में पैसे के लेनदेन और CBI टीम के पहुंचने के बाद अधिकारियों द्वारा रकम फेंके जाने की गवाही दी।
18 गवाहों की गवाही के बाद दोषी करार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अदालत के सामने फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य रखे गए।
इन साक्ष्यों के आधार पर रांची की विशेष CBI अदालत ने कैलाश कांत झा और राजेश्वरी सिंह को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी माना और दोनों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि रिश्वत की रकम को मौके से हटाने या उसे लेने से इनकार करने के बावजूद फोरेंसिक जांच और स्वतंत्र गवाहों समेत अन्य साक्ष्य अदालत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।