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91 फीसदी आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक, मायावती ने यूपी सरकार से SC जाने को कहा

By aonenewstv | Published: Sep 18, 2026 12:17 PM

उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले के लिए लागू करीब 91 फीसदी आरक्षण व्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की मांग की है।

मामला सहारनपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में NEET-UG के जरिए MBBS दाखिले से जुड़ा है। इन कॉलेजों में राज्य कोटे की सीटों के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह व्यवस्था वैधानिक आरक्षण ढांचे के अनुरूप नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने करीब 91 फीसदी आरक्षण वाली व्यवस्था पर रोक लगाते हुए काउंसलिंग पूरी तरह बंद नहीं की। अदालत ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू आरक्षण व्यवस्था के आधार पर काउंसलिंग आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। इसके तहत SC के लिए 21 फीसदी, ST के लिए 2 फीसदी और OBC के लिए 27 फीसदी आरक्षण के आधार पर प्रक्रिया जारी रखने को कहा गया है।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि काउंसलिंग के आधार पर होने वाले दाखिले आगे आने वाले न्यायिक फैसले के अधीन रहेंगे। यानी इस मामले में अंतिम स्थिति हाईकोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर करेगी।

चार मेडिकल कॉलेजों में क्यों बनी स्थिति?

विवाद इन चार मेडिकल कॉलेजों की राज्य कोटे की सीटों पर लागू विशेष आरक्षण व्यवस्था को लेकर है। अदालत के सामने दाखिल याचिका में मौजूदा 2026-27 NEET-UG दाखिला सत्र की सीट मैट्रिक्स को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि आरक्षण की कुल हिस्सेदारी करीब 91 फीसदी तक पहुंच गई थी।

मामले में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार ने पिछली कार्यवाही के दौरान अदालत को आश्वासन दिया था कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से आरक्षण व्यवस्था को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था उस आश्वासन के अनुरूप नहीं थी।

अपर मुख्य सचिव को नोटिस

हाईकोर्ट ने मेडिकल शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि पिछली कार्यवाही के दौरान दिए गए आश्वासन का कथित रूप से पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

मायावती ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट में यह दलील मजबूती से रखनी चाहिए थी कि सहारनपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज और जालौन में बनाए गए मेडिकल कॉलेजों के लिए अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण से जुड़े ‘स्पेशल कंपोनेंट प्लान’ के फंड का इस्तेमाल हुआ है।

मायावती के मुताबिक, इन कॉलेजों में SC वर्ग के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था को सामान्य आरक्षण व्यवस्था से अलग संदर्भ में अदालत के सामने रखा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब हाईकोर्ट की रोक के कारण मेडिकल दाखिले प्रभावित हुए हैं, इसलिए सरकार को राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने 91 फीसदी आरक्षण वाली व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाई है, जबकि सामान्य आरक्षण व्यवस्था के आधार पर MBBS काउंसलिंग जारी रखने की अनुमति दी गई है। मामले में आगे होने वाली सुनवाई और अंतिम आदेश से चारों मेडिकल कॉलेजों की दाखिला प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट होगी।

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