हरीश रावत जन संवाद यात्रा: शैलजा की आपत्ति के बावजूद रामनगर पहुंचे रावत, 8 JCB से हुई फूलों की बारिश
देहरादून/रामनगर: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल बढ़ गई है। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की आपत्ति और यात्रा रोकने की सलाह के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ पर आगे बढ़ रहे हैं। सोमवार को जसपुर से शुरू हुई यात्रा रामनगर पहुंची, जहां रावत का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया।
8 JCB से बरसाए गए फूल
रामनगर में हरीश रावत के स्वागत के लिए समर्थकों ने खास इंतजाम किए। पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी और उनके समर्थकों की ओर से आठ JCB मशीनों से फूलों की बारिश की गई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक मौके पर मौजूद रहे। फूल-मालाओं और छोलिया नृत्य के साथ रावत का स्वागत किया गया।
यात्रा के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल समेत कई कांग्रेस नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी रावत के साथ नजर आए। काफिला रामनगर से आगे कालाढूंगी की ओर रवाना हुआ। इस दौरान समर्थकों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
शैलजा ने जताई थी आपत्ति
हरीश रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने 1 अक्टूबर को उन्हें पत्र लिखा था। शैलजा ने कहा था कि यात्रा के संबंध में न तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और न ही उनसे चर्चा की गई है। उन्होंने चुनाव से पहले पार्टी में किसी समानांतर कार्यक्रम को कांग्रेस के हित में नहीं बताया था।
शैलजा ने रावत से यात्रा आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था। पार्टी नेतृत्व का तर्क है कि चुनाव नजदीक होने के कारण कांग्रेस को एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने और सामूहिक रूप से चुनावी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।
रावत बोले- यह पार्टी का कार्यक्रम नहीं
हरीश रावत ने यात्रा को लेकर अपना पक्ष भी रखा है। उनका कहना है कि वह गंभीर बीमारी से उबरने के बाद अपने शुभचिंतकों और समर्थकों का धन्यवाद करने के लिए जनता के बीच जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हाथ में तिरंगा जरूर है, लेकिन उन्होंने अपने कार्यक्रम को कांग्रेस का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बनाया है।
रावत का कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने वर्षों के जुड़ाव और उत्साह के कारण उनके कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यात्रा को उत्तराखंड के मुद्दों और जनता से संवाद से जोड़कर पेश किया है।
2027 के चुनाव पर भी नजर
रामनगर में रावत की यात्रा के दौरान जिस तरह बड़ी संख्या में समर्थक जुटे और स्वागत किया गया, उसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। रावत लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं और 2027 में बदलाव की बात कर रहे हैं। काशीपुर में उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और कार्यकर्ताओं से जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया।
इससे कांग्रेस के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि रावत की यात्रा महज धन्यवाद और जनसंवाद का कार्यक्रम है या आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उनकी राजनीतिक सक्रियता को मजबूत करने की कोशिश।
अब 7 अक्टूबर की बैठक पर नजर
हरीश रावत और कांग्रेस नेतृत्व के बीच आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व ने रावत से संगठनात्मक समन्वय और पार्टी की एकजुटता को लेकर चर्चा की तैयारी की है। रावत ने भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात का समय मांगा है।
फिलहाल रामनगर में हुए भव्य स्वागत ने उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ पार्टी नेतृत्व चुनाव से पहले संगठन में एकजुटता चाहता है, वहीं दूसरी तरफ हरीश रावत की यात्रा और उनके समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन उनके राजनीतिक प्रभाव का संकेत दे रहा है। अब आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व और रावत के बीच होने वाली बातचीत से इस विवाद की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।