सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग पर फंसा पेच, सहारनपुर से रायबरेली-अमेठी तक इन सीटों पर खींचतान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत का मुद्दा चर्चा में है। दोनों दल गठबंधन के तहत चुनावी तालमेल की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या के साथ-साथ किन विधानसभा सीटों पर किस पार्टी का उम्मीदवार उतरेगा, इसे लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर जैसे जिलों की कई सीटों पर दोनों दलों की दावेदारी बताई जा रही है।
सीटों की संख्या पर भी अलग-अलग दावे
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की करीब 150 विधानसभा सीटों को चिह्नित कर चुनावी तैयारी शुरू की है। वहीं, सीट शेयरिंग को लेकर सूत्रों के हवाले से कांग्रेस की ओर से 105 से 115 सीटों की मांग किए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी कांग्रेस को करीब 85 से 90 सीटें देने के पक्ष में बताई जा रही है। हालांकि अंतिम संख्या और सीटों का बंटवारा दोनों दलों के बीच बातचीत के बाद ही तय होगा।
एबीपी की 27 सितंबर की रिपोर्ट में भी कांग्रेस द्वारा करीब 150 सीटों को लेकर शुरुआती तैयारी किए जाने और अंतिम बातचीत में करीब 100 सीटों से कम पर समझौता नहीं करने की बात सूत्रों के हवाले से कही गई थी।
सहारनपुर में इमरान मसूद की दावेदारी
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सीट शेयरिंग को लेकर पार्टी की ओर से मुखर नजर आ रहे हैं। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर जिले की सात विधानसभा सीटों में से मसूद पांच सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी चाहते हैं। इनमें दो ऐसी सीटें भी शामिल हैं, जहां वर्तमान में सपा के विधायक हैं।
सहारनपुर देहात से आशु मलिक और बेहट से उमर खान सपा के विधायक हैं। ऐसे में इन सीटों को लेकर दोनों दलों की दावेदारी के बीच सहमति बनाना बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
रायबरेली और अमेठी पर भी नजर
रायबरेली और अमेठी भी सीट बंटवारे की बातचीत में महत्वपूर्ण क्षेत्र बताए जा रहे हैं। कांग्रेस इन क्षेत्रों को अपने राजनीतिक आधार वाले इलाकों के तौर पर देखती है, जबकि रिपोर्ट के मुताबिक सपा भी यहां की विधानसभा सीटों पर अपना दावा बनाए रखना चाहती है।
इसके अलावा बाराबंकी और सीतापुर की सीटों को लेकर भी दोनों दलों के बीच खींचतान की बात सामने आई है। इन जिलों में लोकसभा स्तर पर कांग्रेस को सफलता मिली थी, जबकि विधानसभा क्षेत्रों में सपा का संगठन और राजनीतिक आधार मौजूद है। इसी वजह से सीटों के चयन को लेकर दोनों पक्षों के हित टकराते दिखाई दे रहे हैं।
सिर्फ संख्या नहीं, सीटों का चयन भी बड़ा मुद्दा
सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत में केवल यह सवाल नहीं है कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी, बल्कि कौन-कौन सी सीटें मिलेंगी, यह भी अहम है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों और उन सीटों पर जोर दे रही है, जहां उसे चुनावी आधार मजबूत करने की संभावना दिखाई देती है। दूसरी तरफ सपा अपने मौजूदा विधायकों और संगठनात्मक आधार वाली सीटों को बनाए रखना चाहती है।
इससे सीटों की सूची तैयार करना दोनों दलों के लिए जटिल प्रक्रिया बन गई है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में सीटों की संभावित संख्या को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए इन्हें अंतिम समझौते के रूप में नहीं देखा जा सकता।
नेताओं की बयानबाजी से बढ़ी चर्चा
सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जल्द सीट बंटवारे की बात कही है। इसके जवाब में सपा नेताओं ने भी सीटों की संख्या के बजाय चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर सीटें तय करने की बात कही है।
27 सितंबर को अखिलेश यादव ने सपा-कांग्रेस के बीच चल रही सार्वजनिक बयानबाजी को चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी भी रणनीति के तहत अपनी गतिविधियां कर रही है।
आगे बातचीत से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का अंतिम फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं हुआ है। सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर जैसे जिलों की सीटों पर दोनों दलों की दावेदारी के चलते बातचीत में कई स्तरों पर सहमति बनानी होगी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या, उम्मीदवारों की सूची और विधानसभा क्षेत्रों के चयन को लेकर होने वाली बातचीत के बाद ही गठबंधन का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होगा।