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सपा कांग्रेस गठबंधन 2027: इमरान मसूद को इकरा हसन का जवाब

By yogesh jindoria | Published: Sep 22, 2026 07:00 AM

सपा कांग्रेस गठबंधन 2027: इमरान मसूद के तेवर पर इकरा हसन का जवाब, सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ी हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं जारी हैं। दोनों दलों की ओर से साथ चुनाव लड़ने की बात कही गई है, लेकिन सीट बंटवारे और बातचीत की टाइमलाइन को लेकर दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में अंतर सामने आ रहा है। इसी बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के बयानों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है।

सीट शेयरिंग पर जल्द फैसला चाहती है कांग्रेस

रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस की ओर से गठबंधन को जल्द अंतिम रूप देने की मांग की जा रही है। पार्टी चाहती है कि उसे यह स्पष्ट हो कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कितनी और कौन-कौन सी सीटों पर चुनाव लड़ना है, ताकि उम्मीदवारों और संगठन की तैयारियों को उसी हिसाब से आगे बढ़ाया जा सके।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी सीट शेयरिंग में देरी को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने गठबंधन को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक चुनाव की तैयारियों के लिहाज से सीटों पर स्थिति समय रहते साफ होना जरूरी है।

सपा की अपनी चुनावी तैयारी

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।

हाल की सपा राज्य कार्यकारिणी बैठक में अखिलेश यादव ने प्रत्येक विधानसभा सीट पर पार्टी के वोट शेयर को बढ़ाने के लक्ष्य की बात कही। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी गठबंधन की बातचीत के साथ-साथ अपने स्तर पर भी चुनावी तैयारी आगे बढ़ा रही है।

इकरा हसन ने कांग्रेस को लेकर क्या कहा?

इमरान मसूद के बयानों के बीच सपा सांसद इकरा हसन ने गठबंधन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस और सपा का गठबंधन बना रहता है तो ठीक है, लेकिन अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है तो यह उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इकरा हसन का यह बयान सीट शेयरिंग और गठबंधन को लेकर चल रही सार्वजनिक बयानबाजी के बीच आया है। उनके बयान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा की ओर से कांग्रेस के रुख पर प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत की स्थिति अलग विषय है।

इमरान मसूद लगातार उठा रहे हैं सीट बंटवारे का मुद्दा

इमरान मसूद ने गठबंधन को लेकर पहले भी जल्द निर्णय की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा है कि अगर गठबंधन बनना है तो उसे जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए, ताकि दोनों दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारियां कर सकें।

इमरान मसूद ने यह भी कहा है कि कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में संगठन और चुनावी तैयारी के लिहाज से सीटों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक मसूद ने कांग्रेस की ओर से 150 से ज्यादा सीटों की एक सूची सपा को दिए जाने का दावा किया है। हालांकि, सपा की ओर से औपचारिक सीट शेयरिंग वार्ता शुरू होने की पुष्टि नहीं की गई है।

सपा-कांग्रेस के सामने सीट बंटवारे की चुनौती

उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। गठबंधन की स्थिति में दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। कांग्रेस जल्द बातचीत और सीटों की स्पष्टता चाहती है, जबकि रिपोर्टों के अनुसार सपा पहले अपनी संगठनात्मक तैयारियां पूरी करने पर जोर दे रही है।

दोनों दल अपने-अपने स्तर पर अधिक सीटों पर तैयारी की बात कर रहे हैं। हालांकि, गठबंधन की अंतिम सीट व्यवस्था अभी सार्वजनिक रूप से तय नहीं हुई है।

ओवैसी ने भी दिया गठबंधन का प्रस्ताव

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने सपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों से गठबंधन में AIMIM को शामिल करने की अपील की है और कहा है कि पार्टी 2 अक्टूबर तक इंतजार करेगी। इसके बाद वह अपने गठबंधन को लेकर फैसला घोषित करेगी।

ओवैसी के प्रस्ताव पर इमरान मसूद ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर जल्द निर्णय होना चाहिए और कांग्रेस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पश्चिमी यूपी पर नजर

इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रमुख नाम हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बयान इस क्षेत्र में सपा और कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

हालांकि, गठबंधन की अंतिम तस्वीर सीट शेयरिंग पर औपचारिक बातचीत और दोनों दलों के नेतृत्व के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सार्वजनिक बयानों से इतना साफ है कि 2027 के चुनाव को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी तैयारियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं और सीट बंटवारे का मुद्दा आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।

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