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संभल हिंसा आरोपी मुल्ला अफरोज: 20 महीने बाद जेल से रिहाई, सुप्रीम कोर्ट ने NSA रद्द कर UP सरकार पर लगाया जुर्माना

By aonenewstv | Published: Oct 01, 2026 07:10 AM

संभल हिंसा आरोपी मुल्ला अफरोज 20 महीने बाद जेल से रिहा, बोले- जेल के दिन बेहद दर्दनाक थे

संभल: संभल हिंसा मामले में आरोपी मोहम्मद अफरोज उर्फ मुल्ला अफरोज करीब 20 महीने 10 दिन जेल में बिताने के बाद मंगलवार देर रात मुरादाबाद जेल से रिहा होकर अपने घर दीपा सराय पहुंच गए। उनकी रिहाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनकी निरुद्धि को रद्द किए जाने के बाद हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च भी लगाया है।

20 महीने बाद घर पहुंचे मुल्ला अफरोज

मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को उनके खिलाफ NSA के तहत निरुद्धि आदेश जारी किया गया। यह कार्रवाई 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों के बीच की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार देर रात उन्हें मुरादाबाद जेल से रिहा किया गया।

घर पहुंचने के बाद अफरोज ने मीडिया से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपने लिए न्याय बताया। उन्होंने कहा कि जेल में बिताए गए 20 महीने 10 दिन उनके लिए बेहद दर्दनाक रहे। उनके मुताबिक, इस दौरान परिवार को आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई ने संभाली।

परिवार में खुशी का माहौल

रिहाई के बाद अफरोज के परिवार और आसपास के लोगों में खुशी का माहौल नजर आया। अफरोज ने कहा कि घर लौटने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है जैसे परिवार में ईद का माहौल हो। उन्होंने बताया कि जेल के दौरान बच्चों की यादें उनके लिए भावनात्मक सहारा बनी रहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने NSA निरुद्धि आदेश किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 29 सितंबर 2026 को मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निरुद्धि को रद्द कर दिया था। पीठ में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू शामिल थे। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ निवारक निरुद्धि के लिए केवल कथित कबूलनामे को आधार नहीं बनाया जा सकता और संबंधित प्राधिकारी को मामले की परिस्थितियों तथा अन्य प्रासंगिक सामग्री पर भी विचार करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें अफरोज की NSA के तहत निरुद्धि को बरकरार रखा गया था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च लगाया और कहा कि यह राशि अफरोज को एक महीने के भीतर दी जाए।

भाई ने की निष्पक्ष जांच की मांग

अफरोज के भाई शहरोज ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका दावा है कि उनके भाई के खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य या ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि अफरोज को घटना के करीब 50-55 दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। ये दावे अफरोज के परिवार की ओर से किए गए हैं।

आपराधिक मामलों में अभी राहत नहीं

संभल के जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अफरोज को NSA के तहत निरुद्धि के मामले में राहत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे समाप्त नहीं हुए हैं। उनके मुताबिक, संभल हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, जिला अदालत में चार केस फाइलें लंबित हैं और गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई जारी रहेगी।

NSA रद्द होने का मतलब आपराधिक केस खत्म होना नहीं

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दायरा NSA के तहत निवारक निरुद्धि तक है। अदालत ने अफरोज के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। इसलिए NSA से राहत और आपराधिक मुकदमों में राहत को अलग-अलग समझना जरूरी है।

संभल हिंसा मामले में अब मुल्ला अफरोज जेल से बाहर हैं, जबकि उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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