लोनी में अवैध फैक्ट्रियों पर बड़ी कार्रवाई, 34 प्रदूषणकारी धातु इकाइयां सील
गाजियाबाद। लोनी तहसील क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रदूषणकारी अवैध इकाइयों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी गाजियाबाद श्री रविन्द्र कुमार माँदड़ के आदेश पर 29 सितंबर 2026 को कृष्णा विहार फेज-1, कृष्णा विहार फेज-2, अमित विहार, सेवाधाम और बहटा हाजीपुर क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी लोनी श्री दीपक सिंघनवाल के निर्देशन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), विद्युत विभाग, पुलिस विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अभियान के दौरान धातु गलाने वाली कुल 34 अवैध फैक्ट्रियों/इकाइयों के खिलाफ सीलिंग और विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की गई।
प्रशासन के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली अवैध इकाइयों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाना है। हाल के दिनों में लोनी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत सामने आई है।
कई विभागों की संयुक्त टीम ने किया निरीक्षण
29 सितंबर को चलाए गए अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार बहटा हाजीपुर श्रीमती रति गुप्ता, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, विद्युत विभाग के कर्मचारी तथा पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान जिन इकाइयों में नियमों के उल्लंघन और प्रदूषणकारी गतिविधियों का मामला सामने आया, उनके खिलाफ सीलिंग और बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई।
अवैध इकाइयों के संचालन पर प्रशासन सख्त
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी लोनी श्री दीपक सिंघनवाल ने बताया कि तहसील लोनी क्षेत्र में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाकर 34 अवैध एवं प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ सीलिंग और विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तहसील लोनी क्षेत्र में अवैध और प्रदूषणकारी इकाइयों का संचालन किसी भी स्थिति में नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन की ओर से भविष्य में भी इस तरह के निरीक्षण और कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।