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भारत Pantsir-S1 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा? S-400 की सुरक्षा होगी मजबूत

S-400 की सुरक्षा के लिए रूस का Pantsir-S1 खरीदेगा भारत? 13 सिस्टम पर विचार

नई दिल्ली: भारत अपने अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने के लिए रूस के Pantsir-S1 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है। 27 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना और थलसेना के लिए कुल 13 Pantsir-S1 सिस्टम खरीदने के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। इनमें से 10 सिस्टम वायुसेना और तीन सिस्टम थलसेना के लिए प्रस्तावित हैं। हालांकि, इस खरीद को अभी अंतिम मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

इस संभावित खरीद का मुख्य उद्देश्य छोटे ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अन्य हवाई खतरों से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करना है। खास तौर पर इन सिस्टम का इस्तेमाल S-400 की रडार यूनिट, मिसाइल लॉन्चर और अन्य संवेदनशील उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

S-400 के साथ Pantsir-S1 की जरूरत क्यों?

भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम लंबी दूरी से आने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों और विभिन्न प्रकार की मिसाइलों जैसे हवाई खतरों को रोकने के लिए तैयार किया गया है। यह भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हालांकि, आधुनिक युद्ध में छोटे और सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़कर महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनसे निपटने के लिए हर बार लंबी दूरी की महंगी इंटरसेप्टर मिसाइल का इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से उपयुक्त नहीं होता।

इसी चुनौती को देखते हुए Pantsir-S1 जैसे कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यह S-400 की जगह लेने के बजाय उसके आसपास सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत तैयार कर सकता है। इससे लंबी दूरी की मिसाइलों को बड़े और अधिक महत्वपूर्ण हवाई खतरों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।

क्या है रूस का Pantsir-S1 एयर डिफेंस सिस्टम?

Pantsir-S1 रूस में विकसित कम दूरी का मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसकी खासियत यह है कि इसमें मिसाइलों के साथ ऑटोमैटिक तोपें भी लगी होती हैं। इस तरह यह अलग-अलग दूरी पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने की क्षमता रखता है।

इस सिस्टम में दो 30 एमएम की ऑटोमैटिक तोपें और 12 मिसाइलें लगाने की क्षमता होती है। इसकी मिसाइलों का इस्तेमाल निर्धारित परिचालन सीमा के भीतर आने वाले हवाई लक्ष्यों को रोकने के लिए किया जाता है, जबकि तोपें नजदीक पहुंच चुके खतरों से निपटने में मदद करती हैं।

Pantsir-S1 को छोटे ड्रोन, हेलिकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी मोबाइल क्षमता इसे सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण उपकरणों के आसपास तैनात करने के लिए उपयोगी बनाती है।

4 से 6 सेकंड में प्रतिक्रिया देने का दावा

Pantsir-S1 की एक प्रमुख विशेषता इसकी तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता है। प्रकाशित रक्षा रिपोर्टों के मुताबिक, यह सिस्टम किसी हवाई खतरे का पता चलने पर लगभग 4 से 6 सेकंड में प्रतिक्रिया दे सकता है।

इसका रडार हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में मदद करता है। इसके बाद सिस्टम स्थिति के अनुसार मिसाइल या तोप का इस्तेमाल कर सकता है।

ड्रोन और अन्य छोटे हवाई खतरों के खिलाफ यह क्षमता उपयोगी हो सकती है, क्योंकि ऐसे लक्ष्य कई बार कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और उन्हें रोकने के लिए बहुत कम समय मिलता है। हालांकि, वास्तविक प्रदर्शन लक्ष्य की प्रकृति, दूरी, मौसम और परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

वायुसेना को मिल सकते हैं 10 और थलसेना को 3 सिस्टम

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित खरीद में भारतीय वायुसेना के लिए 10 Pantsir-S1 सिस्टम और भारतीय थलसेना के लिए तीन सिस्टम शामिल हैं।

वायुसेना के लिए प्रस्तावित सिस्टम का प्रमुख उद्देश्य S-400 की सुरक्षा को मजबूत करना हो सकता है। इनके जरिए S-400 की रडार यूनिट, लॉन्चर और दूसरे महत्वपूर्ण उपकरणों को छोटे ड्रोन तथा कम दूरी के हवाई हमलों से बचाने में मदद मिल सकती है।

वहीं, थलसेना के लिए प्रस्तावित तीन सिस्टम का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य ठिकानों और अग्रिम क्षेत्रों की सुरक्षा में किया जा सकता है। वहां इनका उपयोग सशस्त्र ड्रोन, हेलिकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों से निपटने के लिए किया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मजबूत हो रही बहुस्तरीय वायु रक्षा

आधुनिक युद्ध में ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों की बढ़ती भूमिका ने दुनिया भर की सेनाओं को अपनी वायु रक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। कम लागत वाले ड्रोन के बड़े समूह भी महंगे सैन्य उपकरणों के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं।

भारत की वायु रक्षा व्यवस्था में लंबी, मध्यम और कम दूरी तक मार करने वाले सिस्टम की अलग-अलग भूमिकाएं हैं। S-400 लंबी दूरी के खतरों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि Pantsir-S1 जैसा सिस्टम नजदीकी सुरक्षा की अतिरिक्त परत उपलब्ध करा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने की संभावनाओं पर भी पहले से चर्चा होती रही है। हालांकि, अलग-अलग रक्षा खरीद प्रस्तावों की मंजूरी और उनके अंतिम अनुबंध की स्थिति अलग हो सकती है।

क्या भारत रूस से 13 Pantsir-S1 सिस्टम खरीदेगा?

फिलहाल, सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना और थलसेना के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। प्रस्ताव के तहत 13 सिस्टम खरीदने की योजना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अंतिम खरीद, लागत और डिलीवरी से संबंधित सभी विवरणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो Pantsir-S1 भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था में एक अतिरिक्त भूमिका निभा सकता है। इससे S-400 जैसे महंगे और महत्वपूर्ण सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: भारत द्वारा रूस के Pantsir-S1 एयर डिफेंस सिस्टम पर विचार करना छोटे ड्रोन और अन्य कम दूरी के हवाई खतरों से निपटने की जरूरत को दर्शाता है। प्रस्तावित 13 सिस्टम में 10 वायुसेना और तीन थलसेना के लिए रखे गए हैं। हालांकि, अंतिम मंजूरी और खरीद की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा कि भारत इस सिस्टम को कब और कितनी संख्या में अपने रक्षा बेड़े में शामिल करेगा।

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