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भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: अमेरिका ने 10 साल के डिफेंस फ्रेमवर्क पर दिया जोर

By aonenewstv | Published: Sep 30, 2026 03:47 AM

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: अमेरिका ने बढ़ाया सहयोग पर जोर, 10 साल के डिफेंस फ्रेमवर्क से मजबूत होगी साझेदारी

नई दिल्ली: अमेरिका भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। अमेरिकी सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को दी गई 2026 नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी की अपडेट में भारत को अमेरिका की क्षेत्रीय साझेदारियों में महत्वपूर्ण देश के तौर पर रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए हाल में 10 साल के द्विपक्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

10 साल का डिफेंस फ्रेमवर्क

भारत और अमेरिका ने 31 अक्टूबर 2025 को यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के लिए 2025 फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार यह फ्रेमवर्क हर 10 साल में नवीनीकृत किया जाता है और दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए प्रमुख नीति दस्तावेज है। इसमें जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में सैन्य सहयोग तथा इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इस फ्रेमवर्क के तहत दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स सहयोग, रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।

अंडरसी सहयोग पर भी जोर

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में समुद्री और अंडरसी क्षेत्र को भी अहम माना जा रहा है। अमेरिकी रणनीतिक अपडेट में भारत के साथ अंडरसी सहयोग मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात सामने आई है।

भारत और अमेरिका के 2025 डिफेंस फ्रेमवर्क में समुद्री सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र की निगरानी को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा अंडरसी डोमेन अवेयरनेस को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग

अमेरिका और भारत दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। 2025 के डिफेंस फ्रेमवर्क में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को प्राथमिकताओं में रखा गया है।

फ्रेमवर्क में क्वाड जैसे समान विचार वाले साझेदारों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की भी बात कही गई है।

रक्षा तकनीक और सैन्य अभ्यास

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने रक्षा तकनीक, सह-उत्पादन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में दोनों देशों ने अंतरिक्ष, एयर डिफेंस, मिसाइल, समुद्री और अंडरसी तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की बात कही थी। साथ ही सैन्य प्रशिक्षण, अभ्यास और ऑपरेशनल सहयोग को भी सभी प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार नया 10 वर्षीय फ्रेमवर्क रक्षा औद्योगिक क्षमता, तकनीकी सहयोग और दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करने के लिए एक साझा दिशा तय करता है।

आगे क्या?

अमेरिकी सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को दी गई रणनीतिक अपडेट के बाद भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में आने वाले वर्षों में सहयोग के नए क्षेत्रों पर ध्यान बढ़ने की संभावना है। खासतौर पर समुद्री सुरक्षा, अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा तकनीक, संयुक्त अभ्यास और रक्षा औद्योगिक सहयोग महत्वपूर्ण क्षेत्र बने रह सकते हैं।

हालांकि किसी भी नए रक्षा समझौते या परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन का स्वरूप संबंधित दोनों देशों के अलग-अलग फैसलों और प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। मौजूदा 10 वर्षीय फ्रेमवर्क दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिए व्यापक नीति आधार उपलब्ध कराता है।

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