बागपत साइबर ठगी गैंग का खुलासा, WhatsApp ग्रुप से चलता था नेटवर्क; PhD छात्र समेत 8 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के बागपत में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक PhD छात्र और एक BBA छात्र समेत कुछ पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य WhatsApp ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े थे और काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को फोन करते थे।
इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर ठगी का मामला
मामले की शुरुआत 1 सितंबर 2026 को बागपत साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने खुद को इंश्योरेंस से जुड़ा बताकर उसकी पॉलिसी रिन्यू कराने और बोनस दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2,87,984 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने बैंक खातों, कॉलिंग नंबरों और NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान हुई और मेरठ तथा गाजियाबाद से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पहले जुटाते थे पॉलिसी की जानकारी
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का तरीका सामान्य साइबर ठगी से अलग था। आरोपी सीधे किसी अनजान व्यक्ति से पैसे मांगने के बजाय पहले उसकी इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ी जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी या कर्मचारी बताकर पॉलिसी लैप्स होने, रिन्यूअल, बोनस या दूसरी प्रक्रिया के नाम पर बातचीत शुरू करते थे।
पुलिस के अनुसार, पॉलिसीधारकों का डेटा गिरोह के सहयोगियों के जरिए उपलब्ध कराया जाता था। पहले से जानकारी होने के कारण आरोपी पीड़ित से बातचीत के दौरान विश्वास बनाने की कोशिश करते थे और फिर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराते थे।
WhatsApp ग्रुप में बंटा हुआ था काम
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य WhatsApp ग्रुप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। इसी ग्रुप के माध्यम से नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच काम और अपडेट साझा किए जाते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर बैठकर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को फोन करते थे। ठगी की रकम निकालने के बाद आरोपी मोबाइल नंबर और फोन बदल देते थे, जिससे पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश की जाती थी।
PhD छात्र और पूर्व बैंक कर्मचारी भी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में निशांत नाम का एक PhD छात्र भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में एक BBA छात्र के अलावा कुछ ऐसे लोग भी थे जो पहले निजी बैंक और एयरटेल बैंक में काम कर चुके थे। पुलिस अब आरोपियों की भूमिका और उनके संपर्क में मौजूद अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शुभम, तरुण सिंह, सुमित, गौतम, उमंग, निशांत, प्रियांशु और एक अन्य सुमित शामिल हैं। इनमें कुछ आरोपी मेरठ और कुछ गाजियाबाद से जुड़े बताए गए हैं।
14 राज्यों में 51 शिकायतों का पता
पुलिस की जांच में आरोपियों के खिलाफ NCRP पोर्टल पर 14 राज्यों से जुड़ी 51 शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने गिरोह से करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े मामलों का भी पता लगाया है। इन आंकड़ों को पुलिस जांच के आधार पर बताया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
स्कॉर्पियो, बाइक और 16 मोबाइल बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्कॉर्पियो-एन कार, एक यामाहा एफजेड बाइक और 16 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा सात डेबिट कार्ड, चार आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासबुक, सिम कार्ड से जुड़े सामान और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सोने-चांदी के आभूषण और 19 हजार रुपये नकद बरामद किए जाने की भी जानकारी दी है।
डेटा उपलब्ध कराने वालों की भी तलाश
पुलिस की जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। जांच में यह सामने आया है कि पॉलिसीधारकों का डेटा गिरोह को उपलब्ध कराने वाले लोग भी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ऐसे लोगों की पहचान करने और उनकी भूमिका की जांच कर रही है।
बागपत साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से सावधान रहने और संदिग्ध कॉल पर अपनी पॉलिसी, बैंक या निजी जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है।