पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरिया थाना क्षेत्र के जिठनिया गांव में 65 वर्षीय मोहनदेई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में उनके दामाद महेंद्रपाल पर हत्या का आरोप लगा है। आरोप है कि महिला की हत्या करने के बाद शव को भूसे के ढेर में छिपाकर जला दिया गया।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब महिला के लापता होने के करीब छह दिन बाद परिजन घर के बाहर पड़े जले हुए भूसे की राख हटाने लगे। इसी दौरान वहां से जली हुई हड्डियां और कांच की चूड़ियां मिलीं। इसके बाद परिजनों को हत्या की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने मामले में महेंद्रपाल को हिरासत में लिया है। मृतका के बेटे सुरेश की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि, पुलिस अभी मामले की सभी संभावित वजहों की जांच कर रही है।
छह दिन बाद राख से मिले सुराग
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार मोहनदेई गांव के बाहर कब्रिस्तान के पास अकेली रहती थीं। परिवार के दूसरे सदस्य गांव में अलग-अलग स्थानों पर रहते थे।
बताया गया कि 31 जुलाई की रात करीब आठ बजे महेंद्रपाल कथित तौर पर मोहनदेई के घर पहुंचा था। इसके बाद महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। परिवार ने उनकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिलीं।
करीब छह दिन बाद जले हुए भूसे की राख से हड्डियां और चूड़ियां मिलने के बाद मामला अचानक गंभीर हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और बरामद अवशेषों को कब्जे में लिया।
अब इन अवशेषों की पहचान और घटना की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की तैयारी की जा रही है।
पत्नी को मायके बुलाने को लेकर था विवाद?
मृतका के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, महेंद्रपाल अपनी पत्नी मीना के साथ मारपीट करता था। इसी वजह से मोहनदेई अपनी बेटी को कई बार अपने पास बुला लेती थीं।
बताया गया है कि बेटी का बार-बार मायके आना महेंद्रपाल को पसंद नहीं था और इसी बात को लेकर सास-दामाद के बीच विवाद रहता था।
फिलहाल यही विवाद हत्या की कथित वजह के तौर पर सामने आया है। हालांकि पुलिस इसे अंतिम कारण नहीं मान रही है और अन्य पहलुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।
क्या जमीन और मुआवजे का विवाद भी था?
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में परिवार के पुराने विवाद भी सामने आ रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, करीब दो वर्ष पहले परिवार के एक बेटे की मौत के बाद मिले मुआवजे के बंटवारे को लेकर भी विवाद हुआ था। हालांकि, परिजनों का कहना है कि यह मामला बाद में खत्म हो गया था।
इसके अलावा मोहनदेई के नाम करीब ढाई बीघा जमीन दर्ज होने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन या आर्थिक मामलों को लेकर किसी तरह का विवाद था या नहीं।
यानी पुलिस के सामने फिलहाल सिर्फ सास-दामाद के रिश्ते का विवाद ही नहीं, बल्कि मुआवजा और संपत्ति से जुड़े संभावित कारण भी जांच का हिस्सा हैं।

गुमशुदगी की सूचना में देरी ने बढ़ाए सवाल
इस मामले में एक और सवाल महिला की गुमशुदगी की सूचना को लेकर उठ रहा है।
मोहनदेई अकेली रहती थीं और 31 जुलाई के बाद वह दिखाई नहीं दीं। इसके बावजूद पुलिस को उनकी गुमशुदगी की सूचना तत्काल क्यों नहीं दी गई, इसकी भी जांच की जा रही है।
क्या परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार के यहां चली गई होंगी या फिर किसी अन्य वजह से सूचना देने में देरी हुई? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है।
शव को जलाने के आरोप ने जांच को बनाया चुनौतीपूर्ण
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बरामद अवशेषों से घटना की पूरी कड़ी जोड़ना है।
परिवार की तहरीर में आरोप लगाया गया है कि महिला की हत्या के बाद शव को भूसे में जलाया गया। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि शव को घटनास्थल से कैसे हटाया गया, उसे भूसे तक कैसे ले जाया गया और पूरी घटना को अंजाम देने में कितने लोग शामिल थे।
इन सवालों के जवाब जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर तलाशे जा रहे हैं।
डीएनए जांच से खुलेगा मौत का राज
पुलिस ने बरामद हड्डियों और अन्य अवशेषों को जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डीएनए जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद अवशेष मोहनदेई के ही हैं या नहीं।
एसपी सुकीर्ति माधव के मुताबिक मामले की जांच में कई बिंदु सामने आ रहे हैं। आरोपियों और मृतका के परिजनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के सामने अब ये बड़े सवाल
इस मामले में कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं—
- मोहनदेई की मौत की वास्तविक वजह क्या थी?
- क्या बेटी को मायके बुलाने का विवाद ही हत्या की वजह था?
- क्या मुआवजे के पुराने विवाद की कोई भूमिका थी?
- क्या जमीन से जुड़ा कोई विवाद हत्या के पीछे हो सकता है?
- महिला की गुमशुदगी की सूचना देने में देरी क्यों हुई?
- क्या वारदात में सिर्फ एक व्यक्ति शामिल था या कोई और भी था?
- बरामद अवशेष वास्तव में मोहनदेई के हैं या नहीं?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
निष्कर्ष:
पीलीभीत के जिठनिया गांव में 65 वर्षीय मोहनदेई की संदिग्ध मौत ने परिवार और पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दामाद महेंद्रपाल पर हत्या का आरोप है और पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
फिलहाल बेटी को मायके बुलाने को लेकर पुराना विवाद एक संभावित वजह के तौर पर सामने आया है, लेकिन पुलिस जमीन, मुआवजा और पारिवारिक संबंधों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जले हुए भूसे से मिले अवशेषों की डीएनए जांच और अन्य साक्ष्यों के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।