नेपाल बाढ़ में लापता भारतीयों की तलाश तेज, 3,000 DNA सैंपल पर काम कर रही फॉरेंसिक टीम
नई दिल्ली: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद लापता भारतीयों की पहचान की कोशिश तेज कर दी गई है। काठमांडू में तैनात भारतीय फॉरेंसिक टीम नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 3,000 DNA सैंपल पर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से अब तक 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार किए जा चुके हैं।
275 भारतीय नागरिक अब भी लापता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ के बाद 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा भारतीय मूल के कई अन्य लोग और भारतीय डायस्पोरा से जुड़े लोग भी लापता हैं। उनकी पहचान और स्थिति का पता लगाने के लिए भारतीय फॉरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल में काम कर रहे हैं।
फॉरेंसिक टीम काठमांडू की कई प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर DNA प्रोफाइल तैयार कर रही है। इन प्रोफाइल का इस्तेमाल बरामद शवों या मानव अवशेषों की पहचान करने और लापता लोगों के परिजनों के DNA सैंपल से मिलान करने में किया जा रहा है।
3,000 सैंपल में से 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार
MEA के अनुसार भारतीय टीम को करीब 3,000 सैंपल पर काम करना है। इनमें से अब तक 1,200 से अधिक DNA प्रोफाइल तैयार हो चुके हैं। हालांकि, इन प्रोफाइल के आधार पर कितने लापता लोगों की पहचान हो चुकी है, इसका कोई अंतिम आंकड़ा विदेश मंत्रालय ने नहीं दिया है। अधिकारियों को अब नेपाल के संबंधित अधिकारियों से आगे की जानकारी का इंतजार है।
नेपाल पुलिस ने भी विदेशों में रहने वाले लापता लोगों के परिजनों के लिए DNA सैंपल देने की प्रक्रिया बताई है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, प्राथमिकता लापता व्यक्ति के माता-पिता, बेटे या बेटी जैसे प्रथम श्रेणी के रिश्तेदार के DNA सैंपल को दी जाती है। यदि ऐसे रिश्तेदार उपलब्ध नहीं हों तो भाई या बहन का सैंपल लिया जा सकता है।
26 अगस्त की फ्लैश फ्लड ने मचाई थी भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया था। बाढ़ के तेज बहाव में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। बाढ़ का असर त्रिशूली नदी और उसके आसपास के इलाकों में विशेष रूप से देखने को मिला।
आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए और राहत एवं बचाव एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण शवों और लापता लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
भारत ने नेपाल को भेजी विशेषज्ञ टीमें
बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री और विशेषज्ञ दल भेजे। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की ओर से भेजी गई 54 सदस्यीय टीम में 30 टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ, 19 फॉरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल थी। भारतीय फॉरेंसिक विशेषज्ञ 29 अगस्त से नेपाली अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं।
भारत की ओर से राहत सामग्री लेकर विशेष उड़ानें भी नेपाल भेजी गईं। एक भारतीय वायुसेना की उड़ान में 11 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई थी।
परिवारों को अब पहचान का इंतजार
बाढ़ में अपनों को खोने या उनके लापता होने के बाद कई परिवार अभी भी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया का उद्देश्य बरामद मानव अवशेषों और लापता लोगों के बीच वैज्ञानिक तरीके से पहचान स्थापित करना है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि जिन अवशेषों की तत्काल पहचान संभव नहीं हो पाती, उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि बाद में परिजनों के सैंपल से मिलान कर पहचान की जा सके।