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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण: 609 किमी छोटी सड़कों की होगी मैकेनिकल सफाई, रियल-टाइम मॉनिटरिंग

By aonenewstv | Published: Sep 30, 2026 04:23 AM

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण: 609 किमी छोटी सड़कों की होगी मैकेनिकल सफाई, IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम निगरानी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने जमीनी कार्रवाई के साथ वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छोटी सड़कों पर मैकेनिकल सफाई का दायरा बढ़ाने और प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान के लिए IIT दिल्ली के साथ मिलकर सिस्टम विकसित करने को मंजूरी दी गई। ये फैसले दिल्ली के विंटर एक्शन प्लान 2026-27 के तहत लिए गए हैं। 

609 किलोमीटर छोटी सड़कों पर होगी मैकेनिकल सफाई

सरकार के मुताबिक, सड़क की धूल पार्टिकुलेट प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसी को देखते हुए अब उन छोटी सड़कों को भी मैकेनिकल स्वीपिंग के दायरे में लाया जाएगा, जहां अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इस योजना में 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों को शामिल किया गया है। इसके लिए दिल्ली के 250 वार्डों की 854 सड़कों की पहचान की गई है। 

30 इलेक्ट्रिक रोड स्वीपिंग मशीनें होंगी तैनात

दिल्ली सरकार दिल्ली नगर निगम (MCD) को 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने के लिए अनुदान देगी। इन मशीनों को जमीन पर तैनात करने और उनका संचालन करने की जिम्मेदारी MCD की होगी।

सरकार के अनुसार, इस परियोजना पर 10 वर्षों में करीब 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक मशीनों के इस्तेमाल का उद्देश्य सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सफाई प्रक्रिया से होने वाले उत्सर्जन को भी कम रखना है। 

IIT दिल्ली के साथ 24 घंटे प्रदूषण की निगरानी

कैबिनेट ने IIT दिल्ली के सहयोग से PM2.5 और PM10 के प्रदूषण स्रोतों की लगातार और रियल-टाइम निगरानी के लिए एक सिस्टम विकसित करने को भी मंजूरी दी है।

इस सिस्टम के जरिए 24 घंटे के दौरान प्रदूषण में अलग-अलग स्रोतों के योगदान का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसमें वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों का आकलन किया जाएगा। इससे प्रदूषण के हॉटस्पॉट की पहचान और लक्षित कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद है। 

पांच साल की होगी IIT दिल्ली के साथ साझेदारी

IIT दिल्ली के साथ यह परियोजना पांच साल के लिए होगी और इस पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इस योजना के तहत राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को फिर से सक्रिय किया जाएगा। इसके साथ ही मोबाइल प्रयोगशाला को भी दोबारा शुरू किया जाएगा, ताकि प्रदूषण वाले इलाकों और स्थानीय स्रोतों का लक्षित अध्ययन किया जा सके।

परियोजना में रियल-टाइम डैशबोर्ड, विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। 

पूरे साल प्रदूषण पर कार्रवाई का दावा

दिल्ली सरकार ने कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार सड़क की धूल के अलावा वाहनों से होने वाले प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण और कचरे या बायोमास जलाने जैसे स्रोतों पर भी काम करने की योजना बना रही है।

सरकार के मुताबिक, MCD, DPCC, संबंधित विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय के जरिए प्रदूषण के स्रोतों पर काम किया जाएगा। 

जमीनी सफाई और वैज्ञानिक निगरानी पर जोर

कैबिनेट के दोनों फैसलों का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के दो पहलुओं को साथ लेकर चलना है। एक तरफ छोटी सड़कों पर मैकेनिकल सफाई के जरिए सड़क की धूल को नियंत्रित करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी तरफ IIT दिल्ली के साथ रियल-टाइम सिस्टम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि किसी इलाके में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत कौन से हैं।

दिल्ली सरकार के अनुसार, वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई को ज्यादा लक्षित किया जा सकेगा और अलग-अलग स्रोतों के योगदान का लगातार आकलन किया जा सकेगा। 

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