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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फैली ISI वाली खबर का सच क्या? पंजाब पुलिस ने वायरल वीडियो को बताया भ्रामक

अमृतसर: जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो और उनके साथ लगाए गए कैप्शन के जरिए यह दावा किया जा रहा था कि अमृतसर पुलिस द्वारा पकड़े गए पाकिस्तानी आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल का जंतर-मंतर प्रदर्शन से संबंध है।

अब पंजाब पुलिस ने इन दावों का खंडन करते हुए स्थिति साफ की है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे वीडियो को काट-छांटकर और भ्रामक कैप्शन के साथ पेश किया गया, जिससे लोगों के बीच गलत धारणा पैदा हो रही है।

पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों का जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन या वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों से कोई संबंध नहीं है।

आखिर वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा था?

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप तेजी से प्रसारित किए गए। इन वीडियो में अमृतसर में पकड़े गए संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल और जंतर-मंतर प्रदर्शन को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की गई।

एडिट किए गए वीडियो और उनके साथ लिखे गए कैप्शन को देखने पर ऐसा प्रतीत हो सकता था कि गिरफ्तार आरोपी खुद प्रदर्शन में शामिल थे या प्रदर्शनकारियों के साथ उनका कोई संबंध था।

पंजाब पुलिस के अनुसार, यही वह दावा है जो भ्रामक है।

पुलिस ने कहा कि वास्तविक प्रेस वार्ता में ऐसी कोई बात नहीं कही गई थी कि गिरफ्तार आरोपी जंतर-मंतर के प्रदर्शन का हिस्सा थे।

4 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया था?

पंजाब के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, 4 अगस्त को अमृतसर पुलिस आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले की जानकारी दी गई थी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने जंतर-मंतर का दौरा किया था। आरोप है कि उन्होंने वहां की रेकी की और प्रदर्शनकारियों पर पेट्रोल बम से हमला करने की योजना बनाई थी।

लेकिन पुलिस की ओर से दिए गए बयान में कहीं यह नहीं कहा गया कि आरोपी जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल थे।

इसके अलावा, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों और कथित आतंकी मॉड्यूल के बीच किसी तरह के संबंध की बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं कही गई थी।

वीडियो को कैसे बनाया गया भ्रामक?

पंजाब पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे कुछ वीडियो में मूल वीडियो के चुनिंदा हिस्सों का इस्तेमाल किया गया।

वीडियो को इस तरह एडिट किया गया कि देखने वाले को पूरी घटना का संदर्भ नहीं मिल पाता। इसके बाद वीडियो के साथ ऐसे कैप्शन लगाए गए, जिनसे कथित तौर पर यह धारणा बन सकती थी कि जंतर-मंतर प्रदर्शन और गिरफ्तार आतंकी मॉड्यूल के बीच कोई सीधा संबंध था।

पुलिस के मुताबिक, मूल ऑडियो या तथ्यों के साथ सीधे तौर पर छेड़छाड़ नहीं की गई, लेकिन वीडियो की चयनात्मक एडिटिंग और भ्रामक कैप्शन के कारण उसके अर्थ को बदलने की कोशिश की गई।

पंजाब पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील मामले से जुड़ी जानकारी को बिना पुष्टि के आगे साझा न करें।

खास तौर पर आतंकी गतिविधियों, सुरक्षा और सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अधूरी जानकारी तेजी से अफवाह का रूप ले सकती है।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को उसके मूल संदर्भ के साथ देखना बेहद जरूरी है।

IT Act के तहत कार्रवाई की तैयारी

पंजाब पुलिस ने कहा है कि भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि एडिटेड वीडियो और भ्रामक कैप्शन को किस तरह प्रसारित किया गया और इसके पीछे कौन लोग या सोशल मीडिया अकाउंट सक्रिय थे।

हालांकि, पुलिस की ओर से जारी स्पष्टीकरण का मुख्य उद्देश्य वायरल दावे और मूल प्रेस वार्ता के बीच अंतर साफ करना है।

जंतर-मंतर को लेकर क्यों संवेदनशील है मामला?

जंतर-मंतर दिल्ली में लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में वहां चल रहे किसी प्रदर्शन को आतंकी गतिविधियों से जोड़ने वाला दावा बेहद संवेदनशील हो सकता है।

यदि किसी वीडियो में वास्तविक बयान का केवल एक हिस्सा दिखाया जाए और उसके साथ अलग संदर्भ वाला कैप्शन लगा दिया जाए, तो दर्शकों के बीच गलत संदेश पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

इसी वजह से पंजाब पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर सार्वजनिक रूप से सफाई जारी की है।

क्या है पुलिस की स्पष्ट स्थिति?

पंजाब पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अमृतसर में गिरफ्तार कथित पाकिस्तानी ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल द्वारा जंतर-मंतर की रेकी और प्रदर्शनकारियों पर हमले की कथित योजना का जिक्र किया गया था।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी जंतर-मंतर के प्रदर्शन का हिस्सा थे या प्रदर्शनकारियों का उस मॉड्यूल से कोई संबंध था।

यही अंतर पंजाब पुलिस अपने स्पष्टीकरण में स्पष्ट करना चाहती है।

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