चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में गंभीर हालत में नवजात को अस्पताल ले जा रही 108 एंबुलेंस रास्ते में खराब हो गई। एंबुलेंस को दोबारा चालू करने के लिए पुलिसकर्मियों और राहगीरों ने काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। नवजात की हालत बिगड़ती देख ट्रैफिक पुलिस के सिपाही अजय यादव ने बच्चे और उसके परिजन को अपनी बाइक से जिला अस्पताल पहुंचाया। घटना 17 सितंबर 2026 को सामने आई।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार देर रात एक नवजात शिशु की हालत गंभीर होने पर उसे मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। परिजन बच्चे को डायल 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लेकर जा रहे थे। शहर कोतवाली क्षेत्र में एलआईसी चौराहे के पास पहुंचने पर एंबुलेंस अचानक चलते-चलते बंद हो गई।
अस्पताल कुछ ही दूरी पर था, लेकिन एंबुलेंस के खराब होने के बाद परिजन और मौके पर मौजूद लोगों ने उसे स्टार्ट कराने की कोशिश की। ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने राहगीरों की मदद से एंबुलेंस को धक्का लगाकर चालू करने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बावजूद एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हो सकी। इस दौरान नवजात की हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी।
स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस के सिपाही अजय यादव ने तत्काल कदम उठाया। उन्होंने गंभीर हालत में नवजात और उसके परिजन को अपनी बाइक पर बैठाया और जिला अस्पताल की ओर रवाना हो गए। बच्चे को समय रहते अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, समय पर उपचार शुरू होने से नवजात की जान बच गई।
इस घटना का एंबुलेंस को धक्का लगाने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद खराब एंबुलेंस और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले की जानकारी मिलने के बाद अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 102 और 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े जिले के अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने सभी एंबुलेंस की स्थिति की जांच कराने और वाहनों को ठीक रखने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी दोबारा सामने न आए।
इस घटना में एक ओर एंबुलेंस के बीच रास्ते में खराब होने से गंभीर मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं ट्रैफिक सिपाही अजय यादव की तत्परता से नवजात को समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिली। घटना ने आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की नियमित जांच और रखरखाव की जरूरत को भी सामने ला दिया है।