LANGUAGE ▾
FRI, AUG 21, 2026 | UPDATED 04:07 AM IST

‘कुछ लोग जिंदगी भर बच्चे ही रहते हैं…’ CM योगी का अखिलेश पर बड़ा तंज, बुनकरों को भी दिया बड़ा संदेश

लखनऊ: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर लखनऊ के लोकभवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने, बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने पर जोर दिया गया।

हालांकि, समारोह के दौरान मुख्यमंत्री का एक राजनीतिक बयान भी चर्चा में आ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन पर तंज कसा।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। बबुआ भी यही करते थे।’ इसके बाद उन्होंने पिछली सरकारों की कार्यशैली और प्रदेश के विकास को लेकर भी निशाना साधा।

योगी ने बिना नाम लिए अखिलेश पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि पहले प्रदेश की सरकारों की प्राथमिकताएं अलग थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दोपहर में उठते थे, दोपहर बाद तैयार होते थे और शाम को दूसरी गतिविधियों में व्यस्त हो जाते थे, उनके पास प्रदेश के बारे में सोचने का समय कहां था।

हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर माना गया।

योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पिछली सरकारों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्याएं थीं। वहीं उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार विकास और सुशासन के आधार पर काम कर रही है।

12 उत्कृष्ट बुनकरों को मिला संत कबीर पुरस्कार

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 12 उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया।

पुरस्कार चार अलग-अलग श्रेणियों में दिए गए। प्रथम स्थान हासिल करने वाले बुनकरों को एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पाने वालों को 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाले बुनकरों को 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

इस दौरान वाराणसी के बुनकरों का भी खासा दबदबा देखने को मिला।

साड़ी और ब्रोकेड श्रेणी में वाराणसी के बुनकर आगे

साड़ी, ब्रोकेड एवं ड्रेस मैटेरियल श्रेणी में चोलापुर के जमालुद्दीन को जामदानी साड़ी के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। रामनगर के अनिकेत कुमार मौर्य को दूसरा और आजमगढ़ के मोहम्मद अकमल को तीसरा पुरस्कार दिया गया।

वहीं सूती दरी, वूलेन दरी, आसनी एवं दरेट श्रेणी में सीतापुर के अकील अहमद को प्रथम पुरस्कार मिला। कानपुर नगर के मोहम्मद शारिक अंसारी दूसरे और बरेली के मुन्ने अली तीसरे स्थान पर रहे।

होम फर्निशिंग और स्टोल श्रेणी के विजेता भी सम्मानित

बेडशीट, बेड कवर एवं होम फर्निशिंग श्रेणी में बिजनौर के कफील अहमद को प्रथम, बागपत के प्रमोद कुमार को द्वितीय और गोरखपुर के फैजुल हसन अंसारी को तृतीय पुरस्कार दिया गया।

इसी तरह स्टोल, स्कार्फ, गमछा एवं अन्य श्रेणी में वाराणसी के प्यारे लाल को पहला पुरस्कार मिला। बाराबंकी की आयशा बानो दूसरे और गोरखपुर के रेहान वसीम तीसरे स्थान पर रहे।

मुख्यमंत्री ने सभी पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करते हुए हथकरघा क्षेत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर बाजार देने पर जोर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार बुनकरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।

सरकार का जोर बुनकरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है, ताकि पारंपरिक हथकरघा उद्योग को नई दिशा मिल सके।

हथकरघा क्षेत्र में काम करने वाले कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। ऐसे में सरकार की ओर से उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और बुनकरों को योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

राजनीतिक तंज के बीच विकास का संदेश

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का संबोधन केवल बुनकरों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर राजनीतिक हमला भी बोला और मौजूदा सरकार के विकास एवं कानून-व्यवस्था के मॉडल को सामने रखा।

अखिलेश यादव पर बिना नाम लिए किए गए तंज ने राजनीतिक चर्चा को जरूर तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी पहले भी कई मौकों पर देखने को मिली है।

ऐसे में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस जैसे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की टिप्पणी को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बुनकरों के लिए आगे की चुनौती क्या?

उत्तर प्रदेश में हथकरघा उद्योग लंबे समय से लाखों कारीगरों और उनके परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। पारंपरिक कला को बचाए रखने के साथ-साथ आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करना भी जरूरी है।

बुनकरों की आय बढ़ाने के लिए बेहतर डिजाइन, आधुनिक तकनीक, ऑनलाइन बाजार, ब्रांडिंग और सीधे ग्राहकों तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।

सरकार की योजनाओं और पुरस्कारों से बुनकरों को प्रोत्साहन जरूर मिलता है, लेकिन असली चुनौती यह है कि पारंपरिक कारीगरों को लगातार रोजगार और उनके उत्पादों का उचित मूल्य कैसे मिले।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top