कानपुर विनीत मनोचा हत्याकांड: नए सिम से बेटे को 6 कॉल, 309 बातचीत और वसीयत की भी जांच
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए सवाल सामने आ रहे हैं। पुलिस अब कारोबारी के बेटे सुब्रत की भूमिका और परिवार की संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि कथित शूटर विशाल गौतम ने हत्या से दो दिन पहले नया सिम खरीदा था और इसी नंबर से सुब्रत को छह बार फोन किया गया था।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, विशाल गौतम ने 3 सितंबर को नया सिम खरीदा था। इसके दो दिन बाद 5 सितंबर को विनीत मनोचा की हत्या कर दी गई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या से ठीक पहले खरीदे गए इस नंबर से सुब्रत को फोन क्यों किया गया। इसी नंबर से शालू से भी बातचीत होने की बात जांच में सामने आई है।
सात मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने सुब्रत, उनकी पत्नी शालू और विशाल गौतम से जुड़े सात मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड हासिल किए हैं। ये रिकॉर्ड 1 मई से 6 सितंबर तक के बताए जा रहे हैं और करीब 1,000 पन्नों के हैं। पुलिस इन रिकॉर्ड के जरिए हत्या से पहले और बाद की बातचीत तथा आरोपियों के आपसी संपर्क का पैटर्न समझने की कोशिश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 1 मई से 5 सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल के बीच करीब 309 बार बातचीत हुई। खास बात यह है कि विशाल पहले विनीत मनोचा के यहां काम कर चुका था। कथित चोरी के आरोप में नौकरी से हटाए जाने के बाद भी उसका सुब्रत से संपर्क बना रहा। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों के बीच लगातार बातचीत किस वजह से होती थी और हत्या से पहले हुई बातचीत का क्या संदर्भ था।
हत्या के बाद भी फोन कॉल की जांच
पुलिस हत्या के बाद विशाल गौतम की गतिविधियों को भी ट्रेस कर रही है। पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद विशाल ने अपने सहयोगी राज किशोर को पांच बार फोन किया था। इसके बाद वह उबर कैब से अपने ठिकाने तक गया। पुलिस कैब के रूट, ड्राइवर के बयान और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी जानकारी की भी जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बयानों को सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से मिलाना शुरू किया है। पुलिस यह भी देख रही है कि हत्या से पहले और बाद में आरोपियों की गतिविधियां उनके बयानों से मेल खाती हैं या नहीं।
शालू और विशाल से पूछताछ
अदालत की अनुमति के बाद पुलिस ने जेल में शालू और विशाल से पूछताछ की। दोनों से हत्या की कथित साजिश, आपसी बातचीत और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों को लेकर सवाल किए गए। पुलिस के मुताबिक, शालू ने हत्या की योजना में शामिल होने से इनकार किया है, जबकि विशाल ने कथित तौर पर दावा किया कि उसने शालू के कहने पर विनीत मनोचा की हत्या की। पुलिस इन बयानों को दूसरे साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांच कर रही है।
वसीयत और संपत्तियों की भी जांच
विनीत मनोचा की संपत्तियां भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं। पुलिस आयुक्त के मुताबिक, वर्ष 2022 में पंजीकृत वसीयत में मनोचा ने अपनी संपत्तियां पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम की थीं। पुलिस को कानपुर और गाजियाबाद में उनकी संपत्तियों की जानकारी मिली है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि संपत्तियों और आर्थिक मामलों का हत्या से कोई संबंध था या नहीं। इसके साथ ही सुब्रत से जुड़ी कथित देनदारियों और आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।
कई सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
विनीत मनोचा की 5 सितंबर को हत्या के बाद से पुलिस लगातार मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। अब जांच में सात मोबाइल नंबरों के कॉल रिकॉर्ड, 309 बातचीत, नया सिम, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल पेमेंट, कैब रूट और वसीयत जैसे कई पहलुओं को एक साथ देखा जा रहा है।
नए सिम से सुब्रत को की गई छह कॉल और हत्या से पहले सुब्रत तथा विशाल के बीच हुई लगातार बातचीत फिलहाल पुलिस की जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इन संपर्कों का हत्या से वास्तविक संबंध क्या था, यह जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।