कन्हैया लाल हत्याकांड में पांच आरोपियों को राहत नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत अपीलें की खारिज
जयपुर। उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने पांच आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने NIA मामले में दाखिल पांचों आरोपियों की जमानत अपीलें खारिज करते हुए विशेष अदालत के उन आदेशों को बरकरार रखा, जिनमें पहले उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की गई थीं। फैसला 3 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।
28 जून 2022 को हुई थी कन्हैया लाल की हत्या
यह मामला 28 जून 2022 को उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दो हमलावर धारदार हथियारों के साथ उनकी दुकान में पहुंचे और उनकी हत्या कर दी। हमले में दुकान पर काम करने वाले दो अन्य लोग भी घायल हुए थे।
वारदात के बाद हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि वीडियो और उससे जुड़े बयानों के जरिए धार्मिक आधार पर दुश्मनी फैलाने तथा लोगों में डर का माहौल पैदा करने का प्रयास किया गया। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी।
11 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
NIA ने 22 दिसंबर 2022 को मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें दो आरोपी फरार बताए गए थे। इसी मामले में पांच आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट में दाखिल अपीलों के जरिए आरोपियों ने विशेष अदालत द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के आदेशों को चुनौती दी थी।
UAPA की धारा 43D(5) पर कोर्ट ने क्या कहा?
जमानत पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 43D(5) के प्रावधानों पर विचार किया। इस प्रावधान के तहत यदि अदालत को उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह मानने के उचित आधार मिलते हैं कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं, तो जमानत देने पर कानूनी प्रतिबंध लागू होता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत के चरण में अदालत को मामले का पूरा ट्रायल नहीं करना होता, बल्कि उपलब्ध अभियोजन सामग्री के आधार पर यह देखना होता है कि आरोप प्रथम दृष्टया किस स्थिति में हैं।
अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर भी विचार
हाईकोर्ट ने UAPA के प्रावधानों के साथ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार पर भी विचार किया। आरोपियों की ओर से लंबे समय से हिरासत में रहने और ट्रायल में देरी का मुद्दा उठाया गया था।
कोर्ट ने मामले की मौजूदा स्थिति और ट्रायल की प्रगति को भी देखा। अदालत के समक्ष यह जानकारी रखी गई कि NIA जांच पूरी कर चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और आरोप भी तय किए जा चुके हैं।
ट्रायल की प्रगति को भी माना महत्वपूर्ण
हाईकोर्ट ने पाया कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है। अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों की सूची कम किए जाने और कई गवाहों की गवाही आगे बढ़ने की जानकारी भी रखी गई। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, अदालत ने ट्रायल की प्रगति को जमानत के सवाल पर महत्वपूर्ण परिस्थितियों में शामिल किया।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि इस चरण पर UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता।
पांचों आरोपियों की जमानत अपील खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पांचों आरोपियों की जमानत अपीलें खारिज कर दीं और विशेष अदालत के पहले के आदेशों को बरकरार रखा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अपील पर की गई टिप्पणियां मामले के अंतिम ट्रायल को प्रभावित नहीं करेंगी।
इस फैसले के साथ कन्हैया लाल हत्याकांड के इन पांच आरोपियों को फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिल सकी है। मामले की आपराधिक सुनवाई आगे जारी रहेगी।