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उपचुनाव में BJP को बड़ा झटका? बांकीपुर में प्रशांत किशोर की धमाकेदार बढ़त, दतिया में कांग्रेस आगे; गुजरात में भाजपा ने दर्ज की जीत

By varunendrakathuria@gmail.com | Published: Aug 03, 2026 03:44 PM

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात: की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम चरण की मतगणना तक कई सीटों पर मुकाबला रोचक रहा। बिहार के बांकीपुर में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा को कड़ी चुनौती देते हुए बड़ी बढ़त बना ली है। वहीं मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरी ओर गुजरात के मंजलपुर में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी।

इन तीनों राज्यों के परिणामों को आगामी राजनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने भाजपा को चौंकाया

बिहार की सबसे चर्चित सीट बांकीपुर पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।

21वें राउंड की मतगणना तक प्रशांत किशोर को 42,169 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 30,276 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर लगभग 11 हजार से अधिक वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं।

यह सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट मानी जाती रही है। वे यहां से लगातार पांच बार विधायक रहे। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हुई थी, जिस पर उपचुनाव कराया गया।

शुरुआती राउंड से ही प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं और हर चरण में उनका अंतर बढ़ता गया।


जन सुराज कार्यालय में जश्न का माहौल

प्रशांत किशोर की लगातार बढ़त के बाद पटना स्थित जन सुराज कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

समर्थकों ने नारे लगाए और दावा किया कि यह बिहार की राजनीति में नए बदलाव की शुरुआत है।

चुनावी हलफनामे के अनुसार प्रशांत किशोर लगभग 198 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ इस चुनाव के सबसे संपन्न उम्मीदवार रहे। हालांकि उनके नाम पर निजी कार दर्ज नहीं है।


दतिया में कांग्रेस ने पलटा मुकाबला

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर शुरुआती दौर में भाजपा आगे थी, लेकिन बाद के राउंड में कांग्रेस ने बढ़त हासिल कर ली।

10वें राउंड तक कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 50,307 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 39,396 वोट प्राप्त हुए।

कांग्रेस लगभग 10 हजार वोटों की बढ़त बनाए हुए है।

यह सीट इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था।

दिलचस्प बात यह रही कि नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिले।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि भाजपा के अंदरूनी असंतोष का फायदा कांग्रेस को मिला।


गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की एकतरफा जीत

गुजरात के वडोदरा जिले की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया।

भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,499 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

भाजपा उम्मीदवार को 55 हजार से अधिक जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 24 हजार से अधिक वोट मिले।

जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने गरबा कर जश्न मनाया।

सतीश पटेल ने कहा कि मंजलपुर की जनता ने उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया है और वे क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।

दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम समय में डर का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।


तीनों राज्यों के परिणामों का राजनीतिक संदेश

इन उपचुनावों ने अलग-अलग राज्यों में अलग राजनीतिक संकेत दिए हैं।

  • बिहार में जन सुराज ने भाजपा को कड़ी चुनौती देकर नई राजनीतिक ताकत का संकेत दिया है।
  • मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बढ़त से विपक्ष का मनोबल बढ़ सकता है।
  • गुजरात में भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ एक बार फिर साबित की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति पर भी पड़ सकता है।


मतगणना के दौरान लगातार बदलते रहे रुझान

बांकीपुर में शुरुआती राउंड से ही प्रशांत किशोर आगे रहे और हर राउंड के साथ उनकी बढ़त बढ़ती गई।

दतिया में पहले भाजपा आगे थी, लेकिन चौथे राउंड के बाद कांग्रेस ने बढ़त बना ली और फिर लगातार अंतर बढ़ता गया।

मंजलपुर में शुरुआत से ही भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बनाए रखी और अंततः बड़े अंतर से जीत दर्ज कर ली।


क्या संकेत देते हैं ये नतीजे?

बिहार में जन सुराज का प्रदर्शन राज्य की राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बढ़त संगठन के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

वहीं गुजरात में भाजपा ने एक बार फिर अपने मजबूत संगठन और चुनावी नेटवर्क का प्रदर्शन किया है।

हालांकि विभिन्न सीटों की स्थानीय परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं, इसलिए इन परिणामों को सीधे व्यापक चुनावी रुझान के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

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