Tata Sons IPO पर नोएल टाटा की आपत्ति, बोले- लिस्टिंग से बदल सकता है टाटा ग्रुप का मौजूदा ढांचा
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर कंपनी के भीतर मतभेद सामने आए हैं। Tata Sons के बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुपालन की दिशा में लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जबकि Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया है।
17 सितंबर 2026 को हुई बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को Tata Sons के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने का फैसला भी लिया गया। नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का भी विरोध किया।
नोएल टाटा ने लिस्टिंग का क्यों किया विरोध?
नोएल टाटा का कहना है कि Tata Sons सामान्य होल्डिंग कंपनी नहीं है। Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इस हिस्सेदारी से मिलने वाला लाभ समूह की परोपकारी गतिविधियों से भी जुड़ा है।
नोएल टाटा ने बोर्ड के सामने रखे अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक रूप से लिस्टेड कंपनी बनने के बाद शेयरधारकों का आधार बदल जाएगा और कंपनी के फैसलों पर वित्तीय रिटर्न का दबाव बढ़ सकता है। उनके अनुसार, इससे Tata Sons के मौजूदा स्वरूप और लंबे समय की निवेश रणनीति पर असर पड़ सकता है।
RBI के फैसले के बाद बढ़ा लिस्टिंग का दबाव
Tata Sons को सितंबर 2022 में RBI ने Upper-Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर सार्वजनिक लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं।
Tata Sons ने निजी कंपनी बने रहने के उद्देश्य से अपना NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए RBI में आवेदन किया था। सितंबर 2026 में RBI ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद Tata Sons के लिए नियामकीय अनुपालन और संभावित लिस्टिंग का मुद्दा फिर प्रमुख हो गया।
कंपनी ने पहले क्या कदम उठाए थे?
Tata Sons ने 2024 में RBI के नियामकीय ढांचे से बाहर निकलने की कोशिश के तहत अपने कर्ज का बड़ा हिस्सा चुकाया था। रिपोर्टों के मुताबिक कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज और प्रेफरेंस शेयरों से जुड़े दायित्वों को निपटाने के लिए कदम उठाए थे।
नोएल टाटा का तर्क है कि कंपनी ने निजी स्वरूप बनाए रखने के लिए पहले ही बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताएं की हैं। उनका कहना है कि केवल नियामकीय ढांचे में बदलाव के लिए जल्दबाजी में लिस्टिंग का फैसला नहीं किया जाना चाहिए।
Tata Trusts चाहती है दूसरे विकल्पों पर विचार
नोएल टाटा ने कहा है कि लिस्टिंग को एकमात्र विकल्प मानने से पहले RBI से दोबारा बातचीत, कानूनी सलाह और कंपनी के पुनर्गठन जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
Tata Trusts ने भी कहा है कि उपलब्ध सभी विकल्पों का आकलन किया जाना चाहिए और केवल लिस्टिंग को ही रास्ता नहीं माना जाना चाहिए। Trusts ने Tata Sons में अपनी करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी के कारण कंपनी के भविष्य के ढांचे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
N Chandrasekaran को 5 साल का नया कार्यकाल
इसी बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को Tata Sons के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के रूप में पांच साल का नया कार्यकाल देने का फैसला किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था।
बोर्ड में नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया, जबकि प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। इस फैसले को अब कंपनी की आगे की औपचारिक प्रक्रिया और शेयरधारकों की मंजूरी से गुजरना होगा।
Tata Sons IPO की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं
बोर्ड द्वारा लिस्टिंग की दिशा में कदम उठाने के बावजूद Tata Sons ने अभी किसी IPO की तारीख, इश्यू का आकार या शेयर बाजार में लिस्टिंग की अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है।
Tata Trusts की आपत्ति और RBI के नियामकीय निर्देशों के बीच कंपनी को आगे की प्रक्रिया तय करनी होगी। Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर अंतिम संरचना और समयसीमा आने वाले बोर्ड और शेयरधारक स्तर के फैसलों पर निर्भर करेगी।