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Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में करें इन 7 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद

By yogesh jindoria | Published: Sep 25, 2026 12:47 PM

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में इन 7 चीजों का करें दान, जानें धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में जरूरतमंदों की सहायता और सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यकारी माना जाता है।

साल 2026 में पितृ पक्ष से जुड़ी तिथियों को लेकर अलग-अलग पंचांगों में 26 और 27 सितंबर से शुरुआत का उल्लेख मिलता है। ताजा जानकारी के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष शुरू होगा। इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

1. अन्न दान

पितृ पक्ष में अन्न दान को महत्वपूर्ण माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं, चावल, दाल, आटा या अन्य खाद्य सामग्री अपनी क्षमता के अनुसार दान की जा सकती है। धार्मिक परंपरा में अन्न को जीवन का आधार माना गया है, इसलिए अन्न दान को विशेष महत्व दिया जाता है।

श्राद्ध कर्म के दौरान भोजन तैयार करने के बाद पंचबलि की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है, जिसमें गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटी के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है।

2. गौ सेवा या चारा दान

पितृ पक्ष में गौ सेवा को भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। गाय को हरा चारा खिलाना या गौशाला में चारे और भोजन की व्यवस्था करना दान और सेवा के रूप में किया जा सकता है।

यदि आसपास गौशाला हो तो वहां अपनी सामर्थ्य के अनुसार चारा या अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है।

3. वस्त्र दान

जरूरतमंद व्यक्ति को साफ और उपयोगी वस्त्र दान करना भी पितृ पक्ष की दान परंपरा से जुड़ा है। धोती, कुर्ता, साड़ी, गमछा, चादर या मौसम के अनुसार जरूरी कपड़े दान किए जा सकते हैं।

दान करते समय दिखावे के बजाय जरूरतमंद की वास्तविक आवश्यकता का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है।

4. काले तिल का दान

श्राद्ध और तर्पण की परंपरा में काले तिल का विशेष उल्लेख मिलता है। पितृ कर्म में काले तिल और जल का उपयोग किया जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार काले तिल का दान भी किया जा सकता है।

5. गुड़ और अनाज का दान

पितृ पक्ष में जरूरतमंद परिवारों को गुड़, चावल, गेहूं, दाल और अन्य खाद्य सामग्री देना भी दान का एक तरीका माना जाता है। इस तरह का दान सीधे जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सकता है।

धार्मिक कर्मकांड के साथ सेवा और जरूरतमंदों की मदद को भी पितृ स्मरण से जोड़ा जाता है।

6. फल और भोजन का दान

पितृ पक्ष में जरूरतमंदों को फल और सात्विक भोजन कराया जा सकता है। श्राद्ध कर्म में ब्राह्मण भोजन की परंपरा के साथ पंचबलि का भी उल्लेख मिलता है। भोजन के साथ जल अर्पित करने की परंपरा को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

7. दक्षिणा और आवश्यक सामग्री का दान

श्राद्ध कर्म के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा, वस्त्र, तिल या जरूरत की अन्य सामग्री दान करने की परंपरा है। दान की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया सहयोग माना जाता है।

पितृ पक्ष में तर्पण का भी विशेष महत्व

पितृ पक्ष के दौरान तर्पण में पूर्वजों का नाम और गोत्र स्मरण करके जल अर्पित करने की परंपरा है। इसे आमतौर पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके किया जाता है। धार्मिक मान्यता में जल को पितृ कर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

श्राद्ध और तर्पण के लिए दोपहर का समय विशेष माना जाता है। 2026 के लिए बताए गए मुहूर्त में कुतुप काल दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक और रोहिणी काल 12:24 बजे से 1:12 बजे तक बताया गया है।

पितृ पक्ष में दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति को उपयोगी वस्तु देना और बिना दिखावे के सेवा करना धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण माना जाता है। श्राद्ध कर्म परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष का उद्देश्य केवल दान या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वजों का स्मरण, उनके प्रति कृतज्ञता और जरूरतमंदों की सहायता भी इससे जुड़ी हुई है।

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