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Delhi High Court SIR: BLA को हर जानकारी के सत्यापन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता

Delhi High Court SIR: BLA को हर जानकारी के सत्यापन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए बूथ लेवल एजेंट (BLA) की जिम्मेदारी की सीमा स्पष्ट कर दी है। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त BLA को एन्यूमरेशन फॉर्म में दर्ज सभी जानकारियों के सत्यापन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। BLA केवल उसी जानकारी के लिए जवाबदेह हो सकता है, जिसे वह वास्तव में सत्यापित कर सकता है।

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जस्टिस अमित बंसल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत BLA की जिम्मेदारी उस जानकारी तक सीमित होनी चाहिए, जिसे वह व्यक्तिगत रूप से सत्यापित कर सकता है। कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर एन्यूमरेशन फॉर्म पर लगी तस्वीर का संबंधित मतदाता की पहचान से मिलान करने को बताया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश कुमार गर्ग की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग की SIR संबंधी उस व्यवस्था को चुनौती दी थी, जिसके तहत राजनीतिक दलों के BLA से एन्यूमरेशन फॉर्म में दर्ज जानकारियों को व्यक्तिगत रूप से सत्यापित करने की अंडरटेकिंग मांगी गई थी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि Representation of the People Act या Registration of Electors Rules में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से इस तरह की निजी अंडरटेकिंग मांग सके।

BLA की जिम्मेदारी पर कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि BLA को उन जानकारियों के लिए जिम्मेदार बनाया जा सकता है, जिन्हें वह खुद सत्यापित करने की स्थिति में है। कोर्ट के मुताबिक, एन्यूमरेशन फॉर्म में लगी फोटो का मतदाता की पहचान से मिलान ऐसी जानकारी है, जिसे BLA सत्यापित कर सकता है।

इसका मतलब है कि फॉर्म में दर्ज प्रत्येक व्यक्तिगत या अन्य तथ्य की सत्यता सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी BLA पर नहीं डाली जा सकती।

कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से जुड़ी बड़ी संख्या में जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के प्रतिनिधियों और चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बीच अंतर स्पष्ट होना जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने और संबंधित तथ्यों का वैधानिक सत्यापन चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। याचिका के अनुसार, यह जिम्मेदारी Booth Level Officer (BLO), Assistant Electoral Registration Officer (AERO) और Electoral Registration Officer (ERO) जैसे वैधानिक अधिकारियों की है।

कांग्रेस नेताओं ने तर्क दिया कि सरकारी अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी को किसी प्रशासनिक निर्देश के जरिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों पर नहीं डाला जा सकता। उनके मुताबिक BLA से हर जानकारी की व्यक्तिगत पुष्टि की अंडरटेकिंग मांगना कानून की निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

2002 की वोटर लिस्ट और Frozen Photo Electoral Roll की भी मांग

याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली में SIR लागू होने से पहले राजनीतिक दलों को 2002 की मतदाता सूची की प्रिंटेड और सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने की मांग भी की थी। इसके साथ ही Frozen Photo Electoral Roll उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, ताकि BLA मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों और विसंगतियों की पहचान करने में प्रभावी तरीके से मदद कर सकें।

याचिका में यह भी कहा गया कि केवल वेबसाइट पर पुरानी मतदाता सूची उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि बड़ी फाइलों को डाउनलोड करने, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य व्यावहारिक समस्याओं के कारण बूथ स्तर पर काम करने वाले एजेंटों को दिक्कत हो सकती है।

SIR प्रक्रिया में BLA की भूमिका

SIR के दौरान राजनीतिक दलों के BLA बूथ स्तर पर चुनाव अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं। दिल्ली में इस प्रक्रिया के लिए राजनीतिक दलों ने बड़ी संख्या में BLA नियुक्त किए हैं। इससे पहले दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ राजनीतिक दलों की बैठक में भी SIR को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए BLO और BLA के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया था।

हालांकि, हाई कोर्ट के फैसले के बाद BLA की जवाबदेही को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है। अब BLA से ऐसी जानकारी की जिम्मेदारी नहीं ली जा सकती, जिसे वह व्यक्तिगत रूप से सत्यापित करने में सक्षम नहीं है।

धारा 31 के तहत क्या है प्रावधान?

कोर्ट ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 का उल्लेख करते हुए BLA की जवाबदेही को उस जानकारी तक सीमित बताया, जिसे वह सत्यापित कर सकता है। धारा 31 मतदाता सूची की तैयारी, संशोधन या सुधार से संबंधित गलत घोषणा के लिए दंड का प्रावधान करती है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

ऐसे में कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति को ऐसी जानकारी के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, जिसकी वह स्वयं पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है।

विस्तृत आदेश का इंतजार

दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया है। फिलहाल कोर्ट के विस्तृत आदेश की प्रति आने का इंतजार है। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद यह और स्पष्ट होगा कि निर्वाचन आयोग के संबंधित दिशानिर्देशों पर इसका व्यावहारिक असर किस तरह पड़ेगा।

फिलहाल कोर्ट ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि BLA को SIR के दौरान एन्यूमरेशन फॉर्म की हर जानकारी के सत्यापन के लिए जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता। उसकी जवाबदेही केवल उन जानकारियों तक सीमित होगी, जिन्हें वह वास्तव में सत्यापित कर सकता है।

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