Jhansi News: शादी में गया श्मशान घाट का चौकीदार, महिला के अंतिम संस्कार के लिए 3 घंटे इंतजार करते रहे परिजन
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी से इंसानियत और सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला की मौत के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे, लेकिन वहां ताला लगा हुआ था। काफी देर तक इंतजार करने के बाद पता चला कि श्मशान घाट का चौकीदार ताला लगाकर शादी समारोह में शामिल होने चला गया है। इसके चलते दुख की घड़ी में परिवार को करीब तीन घंटे तक परेशान होना पड़ा।
यह मामला झांसी के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के लहर गिर्द इलाके का है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय व्यवस्थाओं और श्मशान घाट की देखरेख को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
डिलीवरी के बाद बिगड़ी महिला की तबीयत, रास्ते में हुई मौत
जानकारी के मुताबिक, लहर गिर्द निवासी संतोष अहिरवार की 30 वर्षीय पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया था। डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
महिला की अचानक मौत से परिवार में मातम छा गया। घर में जहां नवजात बच्चे के जन्म की खुशियां होनी चाहिए थीं, वहीं परिवार को इस दुखद घटना का सामना करना पड़ा।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी की और शव को लेकर श्मशान घाट पहुंच गए।
शादी में गया था चौकीदार, श्मशान घाट पर लगा था ताला
परिजनों के मुताबिक, उन्होंने श्मशान घाट के चौकीदार को पहले ही सूचना दे दी थी कि वे महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद जब परिवार वहां पहुंचा तो श्मशान घाट के गेट पर ताला लगा हुआ था।
परिजनों ने चौकीदार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह मौके पर मौजूद नहीं था। आसपास के लोगों से जानकारी करने पर पता चला कि चौकीदार श्मशान घाट में ताला लगाकर किसी शादी समारोह में शामिल होने चला गया है।
परिवार को बताया गया कि चौकीदार जल्द वापस आ जाएगा। इसी उम्मीद में परिजन शव के साथ इंतजार करते रहे, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी ताला नहीं खुला।
तीन घंटे तक शव लेकर इंतजार करते रहे परिजन
सबसे दुखद स्थिति यह रही कि परिवार को अंतिम संस्कार के लिए करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। एक तरफ महिला की मौत से परिजन पहले ही सदमे में थे, दूसरी तरफ श्मशान घाट बंद होने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने पहले से सूचना दे दी थी, इसके बावजूद चौकीदार की गैरमौजूदगी के कारण उन्हें इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।
आखिरकार चौकीदार के वापस आने के बाद श्मशान घाट का ताला खोला गया और परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सका।
श्मशान घाट की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर श्मशान घाटों की व्यवस्था और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतिम संस्कार जैसी जरूरी प्रक्रिया के लिए भी यदि लोगों को घंटों इंतजार करना पड़े तो यह व्यवस्था की गंभीर समस्या को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक स्थान पर ताला लगाकर चौकीदार का निजी कार्यक्रम में चले जाना कितना उचित है? क्या ऐसी स्थिति के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, ताकि किसी परिवार को अंतिम संस्कार के समय परेशान न होना पड़े?
इंसानियत को झकझोरने वाली घटना
झांसी की यह घटना इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि परिवार एक तरफ प्रसव के बाद महिला की मौत का दुख झेल रहा था और दूसरी तरफ अंतिम संस्कार के लिए जरूरी व्यवस्था भी समय पर नहीं मिल सकी।
नवजात बच्चे के जन्म के बाद मां की मौत और फिर श्मशान घाट के बंद गेट पर घंटों इंतजार की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। अब जरूरत है कि संबंधित जिम्मेदारियों की जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष: झांसी के लहर गिर्द में हुई यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़े करती है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे परिवार को चौकीदार के शादी में चले जाने के कारण करीब तीन घंटे इंतजार करना पड़ा। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कितनी जरूरी है।