बिहार पुलिस सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में ED का बड़ा एक्शन, आरोपी कौशिक कुमार कर की संपत्तियां जब्त
पटना: बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने इस मामले में आरोपी कौशिक कुमार कर और उससे जुड़ी कंपनियों की संपत्तियों को जब्त किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये संपत्तियां पेपर लीक से हासिल अपराध की कमाई से जुड़ी हुई हैं।
ईडी की यह कार्रवाई बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है। एजेंसी ने 30 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस रिलीज में कार्रवाई की जानकारी दी।
आरोपी और उससे जुड़ी कंपनियों पर ED की कार्रवाई
ईडी की जांच में कौशिक कुमार कर से जुड़ी कंपनियों की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी के नियंत्रण वाली एक अन्य कंपनी एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पांच अचल संपत्तियां दर्ज थीं।
जांच में इन संपत्तियों को अपराध से अर्जित आय से जुड़ा पाया गया। इसके बाद ईडी ने संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की। एजेंसी इस मामले में पेपर लीक से प्राप्त कथित अवैध कमाई और उसके निवेश के तरीकों की जांच कर रही है।
21,391 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा
बिहार पुलिस में कांस्टेबल के 21,391 पदों पर भर्ती के लिए केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) यानी CSBC ने वर्ष 2023 में भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत लिखित परीक्षा 1, 7 और 15 अक्टूबर 2023 को आयोजित की जानी थी।
हालांकि, परीक्षा शुरू होने के बाद ही पेपर लीक की शिकायतें सामने आईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था।
पेपर छापने का ठेका दिलाने के लिए बनाई गई थी प्रॉक्सी कंपनी
ईडी की जांच के मुताबिक, कौशिक कुमार कर ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक थे। आरोप है कि उन्होंने बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल करने के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक प्रॉक्सी कंपनी बनाई थी।
जांच एजेंसी का दावा है कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास न तो प्रश्नपत्र छापने का कोई पुराना अनुभव था और न ही उसकी अपनी कोई प्रिंटिंग प्रेस थी। इसके बावजूद उसे परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका मिल गया।
ईडी के मुताबिक, ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस पहले भी परीक्षा पेपर लीक के मामलों में कथित संलिप्तता के कारण ब्लैकलिस्ट की जा चुकी थी। इसी वजह से उसकी भूमिका छिपाने के लिए कैल्टेक्स कंपनी का इस्तेमाल किया गया।
5.9 करोड़ रुपये एडवांस मिले, 2.01 करोड़ की रकम डायवर्ट
ईडी की जांच में सामने आया कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को प्रश्नपत्र छापने के ठेके के तहत करीब 5.9 करोड़ रुपये एडवांस मिले थे। इसमें से केवल कुछ रकम ही ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजी गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि करीब 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिए गए। कोलकाता स्थित कई ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनका कोई वास्तविक कारोबारी कामकाज नहीं था।
ईडी के मुताबिक, फर्जी लेन-देन के जरिए रकम को अलग-अलग कंपनियों में भेजा गया और बाद में नकदी में बदल दिया गया, जिससे पैसे के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो गया।
कोलकाता से पटना लाते समय लीक हुआ था प्रश्नपत्र
जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा के प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए जा रहे थे। इसी दौरान अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत करके प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया गया।
इस मामले में पटना आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। जांच में टेलीग्राम यूआरएल, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की भूमिका भी सामने आई।
आगे भी जारी रहेगी ED की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पांच अचल संपत्तियों को 2.01 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय के बराबर मूल्य के रूप में अस्थायी तौर पर अटैच किया गया है। एजेंसी अब इस मामले में अपराध से अर्जित अन्य रकम और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल दूसरे आरोपियों तथा कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है।
इस पेपर लीक मामले ने हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया था। परीक्षा रद्द होने से बिहार सरकार को भी आर्थिक नुकसान हुआ और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को दोबारा परीक्षा का इंतजार करना पड़ा।