संजय राउत की नई किताब ‘बोध कीर्तन’ में विजय माल्या का बचाव, पीएम मोदी के भाषण की भी की तारीफ
मुंबई। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत की नई किताब ‘बोध कीर्तन’ विमोचन से पहले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। इस किताब में राउत ने कारोबारी विजय माल्या, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने राजनीतिक अनुभवों को लेकर कई ऐसी बातें लिखी हैं, जिन पर बहस शुरू हो गई है।
किताब का विमोचन शनिवार, 31 अक्टूबर को मुंबई में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे के शामिल होने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम में अंबरीश मिश्र भी मौजूद रहेंगे।
विजय माल्या को लेकर संजय राउत की अलग राय
‘बोध कीर्तन’ में संजय राउत ने विजय माल्या को लेकर अपनी व्यक्तिगत राय रखी है। किताब के ‘माल्या की गोष्ट’ नामक अध्याय में उन्होंने बताया है कि संसद और सेंट्रल हॉल में उनकी माल्या से कई बार मुलाकात होती थी। दोनों अक्सर आसपास बैठते थे और उनके बीच बातचीत भी होती थी।
राउत ने माल्या को मिलनसार, हंसमुख और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला व्यक्ति बताया है। उनका कहना है कि माल्या की आलीशान जीवनशैली को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां बनीं, जबकि यह उनके कारोबारी तौर-तरीकों का हिस्सा भी हो सकती थी।
राउत ने किताब में माल्या को उदार और देशप्रेमी बताते हुए लिखा है कि उनकी मंशा किसी को धोखा देने की नहीं थी। उन्होंने माल्या को फ्रॉड कहे जाने और भगोड़ा बताए जाने पर भी अपनी असहमति जाहिर की है।
माल्या को भगोड़ा कहने पर जताई असहमति
संजय राउत ने किताब में लिखा है कि जब विजय माल्या का कारोबार मुश्किल में आया और बैंकों का कर्ज बकाया रह गया, तब बैंकों को उनके साथ सहयोग करना चाहिए था। राउत के मुताबिक, माल्या को कर्ज माफी नहीं बल्कि कुछ समय की राहत की जरूरत थी।
उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। राउत का आरोप है कि पिछले दस वर्षों में कई उद्योगपतियों को कर्ज के मामलों में राहत दी गई, जबकि माल्या को भी कुछ रियायत दी जा सकती थी।
राउत ने अपनी किताब में दावा किया है कि परिस्थितियों ने माल्या को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया। हालांकि, ये संजय राउत के व्यक्तिगत विचार और उनके द्वारा किताब में किए गए दावे हैं।
गौरतलब है कि विजय माल्या 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। उन्हें 2019 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। भारत में उनके खिलाफ बैंक कर्ज चूक और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले हैं।
पीएम मोदी के भाषणों की भी की तारीफ
किताब का एक और दिलचस्प हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा है। संजय राउत ने ‘दीपस्तंभ’ नाम के अध्याय में प्रधानमंत्री के भाषणों पर अपनी राय लिखी है।
राउत के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक भाषण भले ही उन्हें बहुत प्रभावशाली या अर्थपूर्ण नहीं लगते हों, लेकिन उनके गैर-राजनीतिक भाषण सुनने और पढ़ने में काफी अच्छे होते हैं।
उन्होंने अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव के दौरान भगवान राम पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की विशेष रूप से तारीफ की है। राउत ने इस भाषण को शब्दों का भावुक दीपोत्सव बताया है।
उनका कहना है कि भगवान राम के आदर्श हर भारतीय के लिए दीपस्तंभ यानी मार्गदर्शक रोशनी की तरह हैं।
उद्धव और राज ठाकरे की मौजूदगी में होगा विमोचन
संजय राउत की किताब ‘बोध कीर्तन’ का प्रकाशन मेहता पब्लिशिंग हाउस की ओर से किया जा रहा है। इसका विमोचन 31 अक्टूबर को शाम 5 बजे मुंबई के दादर स्थित ब्राह्मण सहाय्यक संघ में आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों ठाकरे नेताओं की एक साथ मौजूदगी पहले से ही चर्चा का विषय रही है।
किताब के अंशों ने विमोचन से पहले बढ़ाई चर्चा
‘बोध कीर्तन’ में संजय राउत ने अपने निजी अनुभवों, अलग-अलग लोगों से हुई मुलाकातों और पढ़े गए लेखों से मिली जानकारियों के आधार पर कई मुद्दों पर विचार रखे हैं।
किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद विजय माल्या को लेकर उनकी टिप्पणी और प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों की तारीफ ने राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। अब सभी की नजर 31 अक्टूबर को होने वाले विमोचन कार्यक्रम और किताब में शामिल अन्य राजनीतिक किस्सों पर है।