Mainpuri News: सरकारी चकरोड पर कब्जे का आरोप, पिलर और दीवार लगाकर बंद किया रास्ता
शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम और लेखपाल, 29 अक्टूबर को राजस्व टीम ने कराई नापजोख; अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का इंतजार
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। शहर के मोहल्ला बागवान निवासी शिकायतकर्ताओं ने मौजा भैनपुरा देहात स्थित सरकारी चकरोड संख्या 346 पर पिलर और दीवार खड़ी करके रास्ता बंद करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, रास्ता बंद होने से आम लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है। मामले का संज्ञान लेते हुए 29 अक्टूबर को एसडीएम और लेखपाल ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की नापजोख कराई।
अब इस मामले में प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में क्या कहा गया?
मुख्यमंत्री को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में राजेश राठौर पुत्र हरिलाल राठौर और अंकित राठौर पुत्र हरिश्चंद्र राठौर, निवासी मोहल्ला बागवान, मैनपुरी ने अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, मौजा भैनपुरा देहात, परगना एवं तहसील मैनपुरी में सरकारी चकरोड संख्या 346 स्थित है। यह चकरोड गाटा संख्या 347 और 345 के बीच से होकर गुजरता है। आरोप है कि गाटा संख्या 345 के कुछ काश्तकारों ने पहले सरकारी चकरोड पर गेट लगाकर रास्ते को पीछे की ओर से बंद कर दिया था।
शिकायत में बताया गया है कि यह रास्ता देवी रोड से निकलकर सतीवारी तक जाता है और राजस्व नक्शे में सरकारी रास्ते के रूप में दर्ज है।
पिलर और दीवार लगाकर रास्ता बंद करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी चकरोड पर अब पिलर और दीवार खड़ी कर रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इससे इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि सरकारी अभिलेखों के आधार पर रास्ते की स्थिति स्पष्ट कराई जाए और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो चकरोड को कब्जामुक्त कराया जाए।
हालांकि, फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। अतिक्रमण की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी 17 अक्टूबर 2022 को दी गई थी शिकायत
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पहले भी 17 अक्टूबर 2022 को प्रार्थना पत्र दिया था। उनके अनुसार, मौके पर जांच के लिए पहुंचे लेखपाल के सामने विपक्षी पक्ष ने रास्ते को लेकर न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन होने की बात कही थी।
वहीं, शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सरकारी चकरोड को लेकर ऐसा कोई मुकदमा विचाराधीन नहीं है। इस बिंदु पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
मामले में संबंधित पक्षों के दावों और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
29 अक्टूबर को एसडीएम और लेखपाल ने की नापजोख
शिकायत का संज्ञान लेने के बाद 29 अक्टूबर को एसडीएम और लेखपाल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया और राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की नापजोख कराई।
इस दौरान मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई गई। निरीक्षण का उद्देश्य चकरोड की स्थिति और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करना था।
अब प्रशासनिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की संभावना है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी रास्ते से पिलर और दीवार हटाने की कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के बाद कब्जामुक्त होगा सरकारी चकरोड?
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सरकारी चकरोड संख्या 346 को अतिक्रमण से मुक्त कराकर आम जनता के आवागमन के लिए खोला जाए।
इस मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि राजस्व जांच में क्या स्थिति सामने आती है और यदि सरकारी रास्ते पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो प्रशासन उसे हटाने के लिए कब तक कार्रवाई करता है।
फिलहाल, एसडीएम और लेखपाल की ओर से की गई नापजोख के बाद लोगों को प्रशासन के अगले कदम का इंतजार है। सरकारी रास्ते की वास्तविक स्थिति और अतिक्रमण से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच तथा संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।