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Sakhi One Stop Centre Scheme: हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही जगह मिलेगी पुलिस, मेडिकल और कानूनी सहायता

By aonenewstv | Published: Oct 24, 2026 05:12 AM

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना: हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस, इलाज, कानूनी सहायता और सुरक्षित आश्रय की सुविधा

मिशन शक्ति के तहत संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए बना सहारा, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं को मिलती हैं कई महत्वपूर्ण सेवाएं

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। देश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पहल सखी वन स्टॉप सेंटर योजना (Sakhi One Stop Centre Scheme) है। इस योजना का उद्देश्य हिंसा और उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं को एक ही स्थान पर पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा, कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और अस्थायी आश्रय जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है।

अक्सर घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न या अन्य किसी प्रकार की हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को न्याय और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों, अस्पतालों और कानूनी संस्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्था शुरू की, ताकि संकट की स्थिति में महिलाओं को एक ही स्थान से विभिन्न प्रकार की सहायता मिल सके।

क्या है सखी वन स्टॉप सेंटर योजना?

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2015 को की गई थी। वर्तमान में यह योजना केंद्र सरकार के मिशन शक्ति कार्यक्रम की ‘संबल’ उप-योजना के अंतर्गत संचालित की जाती है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को एकीकृत सहायता उपलब्ध कराना है।

इसमें घरेलू हिंसा, शारीरिक उत्पीड़न, यौन हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और अन्य प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं को आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है।

वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए ऐसा सहायता केंद्र है, जहां उन्हें अलग-अलग विभागों के पास जाने के बजाय एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाओं से जोड़ा जाता है।

एक ही छत के नीचे मिलती हैं कई महत्वपूर्ण सुविधाएं

सखी वन स्टॉप सेंटर में हिंसा प्रभावित महिलाओं को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

1. पुलिस सहायता

हिंसा या उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया समझने में सहायता दी जाती है।

जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस थाने से संपर्क स्थापित कर महिला की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सहयोग किया जाता है।

2. चिकित्सा सहायता

यदि किसी महिला को हिंसा के कारण शारीरिक चोट पहुंची है या चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, तो वन स्टॉप सेंटर संबंधित अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं से समन्वय स्थापित करता है।

इसका उद्देश्य प्रभावित महिला को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

3. कानूनी सहायता और परामर्श

कई महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती।

वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं को कानूनी सहायता और सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जरूरत के अनुसार उन्हें संबंधित कानूनी सेवा संस्थाओं से भी जोड़ा जा सकता है।

4. मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्श

हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं को कई बार मानसिक तनाव, भय और असुरक्षा की भावना से गुजरना पड़ता है।

ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित काउंसलर के माध्यम से मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।

इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित महिलाओं को भावनात्मक सहयोग देना और उन्हें अपने भविष्य से संबंधित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।

5. अस्थायी आश्रय की सुविधा

यदि किसी महिला के लिए अपने घर या वर्तमान स्थान पर रहना असुरक्षित हो, तो वन स्टॉप सेंटर में निर्धारित नियमों के अनुसार अल्पकालिक आश्रय की व्यवस्था की जा सकती है।

सामान्यतः वन स्टॉप सेंटर में अधिकतम पांच दिनों तक अस्थायी आश्रय की व्यवस्था होती है। आवश्यकता के अनुसार महिला को दीर्घकालिक आश्रय की सुविधा प्रदान करने वाली संबंधित संस्था से जोड़ा जा सकता है।

6. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा

योजना के अंतर्गत आवश्यकतानुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानूनी या न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग देने की व्यवस्था भी की जा सकती है।

इसका उद्देश्य पीड़ित महिलाओं के लिए संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

किन महिलाओं को मिल सकता है योजना का लाभ?

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना का लाभ हिंसा से प्रभावित महिलाओं को उनकी आयु, सामाजिक स्थिति या वैवाहिक स्थिति के आधार पर भेदभाव किए बिना उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

इसमें घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, शारीरिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और अन्य प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाएं सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के मामलों में बाल संरक्षण से संबंधित लागू कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुसार संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय किया जाता है।

इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में आवश्यक सहायता प्रदान करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है।

उत्तर प्रदेश में भी संचालित हैं वन स्टॉप सेंटर

उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

राज्य के विभिन्न जिलों में इन केंद्रों के माध्यम से हिंसा प्रभावित महिलाओं को पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, कानूनी सेवा संस्थाओं और अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

मार्च 2021 में लोकसभा में दिए गए एक जवाब के अनुसार, उस समय तक उत्तर प्रदेश के वन स्टॉप सेंटरों में लगभग 1.46 लाख मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई थी।

हालांकि, यह आंकड़ा मार्च 2021 तक की अवधि से संबंधित है। इसे अक्टूबर 2026 का वर्तमान आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

यह संख्या बताती है कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने इन सहायता केंद्रों से संपर्क किया था।

मिशन शक्ति के तहत महिलाओं की सुरक्षा पर जोर

केंद्र सरकार का मिशन शक्ति कार्यक्रम महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तीकरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसके अंतर्गत महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हें आवश्यक सहायता और सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

मिशन शक्ति की संबल उप-योजना में वन स्टॉप सेंटर जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य हिंसा प्रभावित महिलाओं को संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।

इन केंद्रों के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, ताकि महिलाओं को सहायता प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

कैसे प्राप्त करें सखी वन स्टॉप सेंटर की सहायता?

किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न का सामना करने वाली महिला अपने नजदीकी वन स्टॉप सेंटर से संपर्क कर सकती है।

महिला स्वयं केंद्र पर पहुंच सकती है या संबंधित सहायता सेवाओं के माध्यम से केंद्र तक पहुंचने में सहयोग प्राप्त कर सकती है।

महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से भी सहायता और संबंधित सेवाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

वहीं, तत्काल पुलिस सहायता या आपातकालीन स्थिति में 112 पर संपर्क किया जा सकता है।

महिलाओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी आपात स्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस या अन्य आपातकालीन सेवाओं की सहायता लें।

महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा, समानता और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।

ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना महिलाओं को केवल शिकायत दर्ज कराने में सहयोग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें चिकित्सा, कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता से जोड़ने का भी प्रयास करती है।

विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, जिनके पास आर्थिक संसाधनों, कानूनी जानकारी या पारिवारिक सहयोग की कमी है।

जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी

महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकारी योजनाओं का संचालन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि महिलाओं और उनके परिवारों को इन योजनाओं की जानकारी हो।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कई महिलाओं को यह जानकारी नहीं होती कि हिंसा या उत्पीड़न की स्थिति में वे कहां सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

ऐसे में स्थानीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

जागरूकता अभियानों के माध्यम से महिलाओं को वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं, हेल्पलाइन नंबरों और कानूनी अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना का उद्देश्य हिंसा प्रभावित महिलाओं को कठिन परिस्थितियों में आवश्यक सहयोग और सुरक्षा प्रदान करना है।

पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा, कानूनी सलाह, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाओं को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती है।

सखी वन स्टॉप सेंटर योजना महिलाओं को यह संदेश देती है कि हिंसा और उत्पीड़न की स्थिति में सहायता के संस्थागत रास्ते उपलब्ध हैं। जरूरत है इन सेवाओं की जानकारी अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने और सहायता व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की।

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