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Delhi NCR Air Pollution: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बढ़ा प्रदूषण, GRAP-1 लागू, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

By aonenewstv | Published: Oct 22, 2026 11:37 AM

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सरकार सख्त, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में GRAP-1 लागू, नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर प्रशासन अलर्ट, निर्माण स्थलों पर निगरानी तेज, सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल पर जोर

नई दिल्ली/नोएडा, 22 अक्टूबर 2026। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद सरकार और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां एक्शन मोड में आ गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के मद्देनजर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के NCR क्षेत्र में आने वाले इलाकों में प्रदूषण रोकने के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा है।

दिल्ली-NCR में अक्टूबर के दौरान मौसम बदलने के साथ प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगती है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक उत्सर्जन वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हवा की गति कम होने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष अभियान

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए प्रशासन ने निर्माण स्थलों, सड़कों और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां निर्माण कार्यों के कारण बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग, पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा रही है। सड़कों पर जमा धूल को मशीनों की मदद से हटाने और पानी का छिड़काव करने से स्थानीय स्तर पर उड़ने वाली धूल को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्री को ढककर रखने, निर्माण मलबे का उचित निस्तारण करने और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

GRAP-1 लागू होने के बाद इन गतिविधियों पर सख्ती

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP वायु प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध तरीके से लागू की जाने वाली कार्ययोजना है। इसके पहले चरण में प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाते हैं।

GRAP-1 के तहत खुले में कूड़ा, प्लास्टिक और सूखे पत्ते जलाने पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके साथ ही सड़कों पर धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी, वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्रों की जांच और औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण जैसे उपायों को प्राथमिकता दी गई है।

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संबंधित विभागों को प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर समयबद्ध तरीके से आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निर्माण गतिविधियों से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। सामने आई जानकारी के अनुसार, निर्माण स्थलों के निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर धूल नियंत्रण संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 30 निर्माण स्थलों के निरीक्षण में 17 स्थानों पर नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई और संबंधित मामलों में लगभग 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, इन निरीक्षणों की सटीक अवधि और जुर्माने के अंतिम विवरण की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे निर्माण सामग्री को खुले में न छोड़ें और धूल रोकने के लिए निर्धारित उपाय अपनाएं। निर्माण स्थलों से निकलने वाले मलबे को सड़कों पर फैलने से रोकना भी जरूरी है।

खुले में कूड़ा और प्लास्टिक जलाने पर प्रतिबंध

प्रदूषण नियंत्रण अभियान के तहत खुले में कूड़ा, प्लास्टिक और सूखे पत्ते जलाने की घटनाओं पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। ऐसी गतिविधियों से निकलने वाला धुआं वातावरण में हानिकारक गैसों और सूक्ष्म प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ा सकता है।

स्थानीय निकायों को कचरे के उचित निस्तारण और खुले में आग जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

बिना वैध PUC वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई

दिल्ली-NCR में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC की जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों की पहचान करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रैफिक जाम के कारण भी वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों का स्थानीय स्तर पर असर बढ़ जाता है।

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, निजी वाहनों का अनावश्यक इस्तेमाल कम करना और वाहनों की नियमित सर्विसिंग कराना प्रदूषण कम करने के महत्वपूर्ण उपाय माने जाते हैं।

प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। प्रदूषण बढ़ने पर आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि खराब वायु गुणवत्ता के दौरान अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचा जाए। जरूरत पड़ने पर उचित फिटिंग वाले एन95 मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रदूषण रोकने के लिए विभागों की जवाबदेही तय करने पर जोर

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने संबंधित राज्यों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

सड़कों पर नियमित सफाई, निर्माण स्थलों का निरीक्षण, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपायों को लगातार लागू करना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अल्पकालिक कार्रवाई के साथ दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, निर्माण गतिविधियों में धूल नियंत्रण तकनीकों का इस्तेमाल और औद्योगिक उत्सर्जन कम करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

दिल्ली-NCR में आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर होने की आशंका बनी रहती है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में प्रदूषक तत्व लंबे समय तक वातावरण में मौजूद रह सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लगातार प्रभावी बनाए रखने की है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत पूरे दिल्ली-NCR में GRAP-1 के तहत शुरू की गई कार्रवाई का उद्देश्य वायु गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है। प्रशासन की ओर से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकारी एजेंसियां सतर्क हैं। आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता की स्थिति के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आगे के कदम तय किए जाएंगे।

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