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Raihan Vadra Bikaner House Controversy: रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी पर विवाद, तस्वीरें हटाने के निर्देश पर भड़के

By aonenewstv | Published: Oct 22, 2026 09:47 AM

रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी पर विवाद: बीकानेर हाउस प्रबंधन पर भड़के प्रियंका गांधी के बेटे, तस्वीरें हटाने के निर्देश पर उठाए सवाल

उपशीर्षक: दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित फोटोग्राफी प्रदर्शनी को लेकर रेहान वाड्रा ने प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि कुछ तस्वीरों को हटाने के लिए उन्हें महज डेढ़ घंटे का समय दिया गया और ऐसा नहीं करने पर प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी गई।

रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के बेटे एवं फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित फोटोग्राफी प्रदर्शनी विवादों में आ गई है। रेहान वाड्रा ने बीकानेर हाउस प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि उनकी प्रदर्शनी में लगाई गई कुछ तस्वीरों को हटाने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रबंधन ने तस्वीरें नहीं हटाने की स्थिति में प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी। इस घटनाक्रम के बाद कला की स्वतंत्रता, संस्थानों की नीतियों और तस्वीरों की विषयवस्तु को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रेहान वाड्रा के मुताबिक, प्रबंधन को उनकी प्रदर्शनी में शामिल पिछले छह से सात महीनों के दौरान खींची गई कुछ तस्वीरों पर आपत्ति थी। उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें किसी राजनीतिक रैली की सीधी तस्वीरें नहीं थीं, बल्कि रैलियों के आसपास के माहौल और आम लोगों के जीवन को दर्शाती थीं। रेहान ने यह भी दावा किया कि उन्होंने तस्वीरों से राजनीतिक नारे पहले ही हटा दिए थे, इसके बावजूद प्रबंधन ने आपत्ति जताई।

बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी पर विवाद

दिल्ली का बीकानेर हाउस कला, संस्कृति और विभिन्न प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए जाना जाता है। यहां आयोजित रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी में उनकी खींची हुई विभिन्न तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं।

रेहान वाड्रा के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान बीकानेर हाउस प्रबंधन ने कुछ तस्वीरों की विषयवस्तु को लेकर आपत्ति जताई। उन्हें बताया गया कि ये तस्वीरें संस्थान की नीति के अनुरूप नहीं हैं।

रेहान ने इस आपत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी तस्वीरें आम लोगों और उनके आसपास की परिस्थितियों को दर्शाती हैं। उनका कहना था कि तस्वीरों का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार करना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं को फोटोग्राफी के माध्यम से सामने लाना था।

शाम 5 बजे तक तस्वीरें हटाने का दिया गया समय

रेहान वाड्रा ने दावा किया कि उन्हें दोपहर करीब 3:30 बजे बताया गया कि प्रदर्शनी में शामिल कुछ तस्वीरें शाम 5 बजे तक हटानी होंगी।

उनके अनुसार, प्रबंधन की ओर से कहा गया कि यदि निर्धारित समय तक तस्वीरें नहीं हटाई गईं तो पूरी प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी।

रेहान ने इतने कम समय में तस्वीरें हटाने का निर्देश दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि किसी कलाकार की प्रदर्शनी में शामिल तस्वीरों पर आपत्ति होने की स्थिति में उसके कारण स्पष्ट किए जाने चाहिए और कलाकार को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर बीकानेर हाउस प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

तस्वीरें नहीं हटाने पर बीकानेर हाउस सील होने का दावा

रेहान वाड्रा ने एक और गंभीर दावा करते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि यदि आपत्तिजनक बताई जा रही तस्वीरें नहीं हटाई गईं तो बीकानेर हाउस को सील किए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है।

रेहान के अनुसार, प्रबंधन की ओर से इस तरह की आशंका जताई गई थी। हालांकि बीकानेर हाउस को सील करने संबंधी किसी आधिकारिक आदेश की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बीकानेर हाउस को सील किए जाने की बात रेहान वाड्रा का दावा है, न कि किसी सरकारी कार्रवाई की पुष्टि।

इस दावे ने पूरे विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

पिछले छह-सात महीनों की तस्वीरों पर थी मुख्य आपत्ति

रेहान वाड्रा ने बताया कि प्रबंधन की मुख्य आपत्ति पिछले छह से सात महीनों के दौरान खींची गई तस्वीरों को लेकर थी।

उनके मुताबिक, इन तस्वीरों में आम लोगों और सार्वजनिक गतिविधियों के आसपास के दृश्य शामिल थे। कुछ तस्वीरें राजनीतिक रैलियों के आसपास के माहौल से जुड़ी थीं, लेकिन वे सीधे किसी राजनीतिक सभा या नेता के प्रचार पर केंद्रित नहीं थीं।

रेहान ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लोगों के जीवन और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देने वाली परिस्थितियों को कैमरे में दर्ज करना था।

उन्होंने यह भी कहा कि तस्वीरों से राजनीतिक नारे हटा दिए गए थे, ताकि प्रदर्शनी का केंद्र राजनीतिक संदेश के बजाय फोटोग्राफी और मानवीय अनुभव बने रहें।

‘ये आम लोगों की तस्वीरें थीं, राजनीतिक रैली की नहीं’

रेहान वाड्रा ने अपनी तस्वीरों की विषयवस्तु को लेकर कहा कि वे आम लोगों की तस्वीरें थीं। उनका कहना था कि तस्वीरें सीधे राजनीतिक रैलियों की नहीं थीं, बल्कि उनके आसपास होने वाली गतिविधियों और परिस्थितियों को दर्शाती थीं।

उन्होंने प्रबंधन की आपत्तियों को लेकर सवाल उठाया कि जब तस्वीरों से राजनीतिक नारे हटा दिए गए थे, तब भी उन्हें प्रदर्शनी से हटाने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई।

फोटोग्राफी में सार्वजनिक जीवन, सामाजिक परिस्थितियों और राजनीतिक आयोजनों के आसपास के दृश्यों को दर्ज करना एक सामान्य कलात्मक एवं दस्तावेजी प्रक्रिया है।

हालांकि किसी प्रदर्शनी स्थल के अपने नियम और आयोजन संबंधी शर्तें भी हो सकती हैं। इस मामले में विवाद का प्रमुख विषय यही है कि संबंधित तस्वीरें उन नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित थीं या नहीं।

बीकानेर हाउस प्रबंधन की नीतियों पर उठाए सवाल

रेहान वाड्रा ने बीकानेर हाउस जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उनका कहना था कि कला और फोटोग्राफी से जुड़े संस्थानों को कलाकारों की अभिव्यक्ति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

रेहान के अनुसार, यदि किसी तस्वीर को लेकर आपत्ति है तो कलाकार को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि संबंधित तस्वीर किस नीति का उल्लंघन करती है।

उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि प्रदर्शनी के दौरान अचानक तस्वीरें हटाने के निर्देश दिए गए।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रबंधन की ओर से आपत्तियों के विस्तृत आधार या किसी औपचारिक लिखित आदेश का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे हैं रेहान

रेहान वाड्रा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के बेटे हैं। वह फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपने कैमरे के माध्यम से सामाजिक जीवन, प्राकृतिक दृश्यों और मानवीय अनुभवों को प्रस्तुत करते रहे हैं।

उनकी फोटोग्राफी प्रदर्शनी को लेकर सामने आए विवाद ने कला और राजनीति के संबंधों पर भी चर्चा को जन्म दिया है।

हालांकि रेहान ने अपनी तस्वीरों को राजनीतिक प्रचार के बजाय आम लोगों के जीवन और सार्वजनिक वातावरण की अभिव्यक्ति बताया है।

कला की स्वतंत्रता और संस्थानों के नियमों पर बहस

इस घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है कि सार्वजनिक या सांस्कृतिक संस्थानों में आयोजित प्रदर्शनियों के दौरान कलात्मक अभिव्यक्ति और आयोजन स्थल की नीतियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाना चाहिए।

कलाकारों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने का अधिकार है, वहीं प्रदर्शनी आयोजित करने वाले संस्थानों के पास भी नियम और आयोजन संबंधी शर्तें हो सकती हैं।

ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट दिशानिर्देश, पारदर्शी निर्णय और कलाकारों के साथ संवाद विवादों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रेहान वाड्रा के मामले में भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि तस्वीरों पर आपत्ति किस आधार पर जताई गई और क्या इस संबंध में उन्हें पहले से कोई जानकारी दी गई थी।

प्रबंधन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार

रेहान वाड्रा ने बीकानेर हाउस प्रबंधन पर तस्वीरें हटाने का दबाव बनाने और प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी देने का दावा किया है।

हालांकि उपलब्ध विवरण के आधार पर प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष स्पष्ट नहीं है। इसलिए तस्वीरें हटाने के निर्देश के पीछे वास्तविक प्रशासनिक या नीतिगत कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।

यदि प्रबंधन की ओर से इस मामले में औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो विवाद के विभिन्न पहलुओं की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

रेहान वाड्रा के आरोपों से बढ़ी चर्चा

दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी से जुड़ा विवाद अब केवल कुछ तस्वीरों को हटाने के निर्देश तक सीमित नहीं रह गया है। इसने कला की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक संस्थानों की नीतियों और सार्वजनिक जीवन को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अधिकार जैसे मुद्दों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

रेहान वाड्रा ने दावा किया कि उन्होंने तस्वीरों से राजनीतिक नारे हटा दिए थे और उनकी प्रदर्शनी का उद्देश्य आम लोगों के जीवन को दिखाना था। इसके बावजूद तस्वीरें हटाने के निर्देश दिए जाने पर उन्होंने प्रबंधन की आलोचना की।

 

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