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CM Himachal Trending News in Hindi 19 October: Sukhvinder Singh Sukhu Updates

By aonenewstv | Published: Oct 19, 2026 05:48 AM

हिमाचल में नए जिले बनाने पर CM सुक्खू का बड़ा बयान, आबादी और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होगा फैसला

शिमला, 19 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नए जिले बनाने का फैसला आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसके लिए गठित आयोग राज्य के मौजूदा जिलों, तहसीलों, उपतहसीलों, विकास खंडों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की समीक्षा करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासन को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना और सरकारी सुविधाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना है। आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही नए जिलों के गठन या प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

नए जिलों के गठन के लिए आयोग करेगा समीक्षा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए चार सदस्यीय आयोग गठित किया है। इस आयोग की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी कर रहे हैं।

आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी राजेश शर्मा सदस्य हैं, जबकि भूमि अभिलेख निदेशक को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

आयोग को राज्य में मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन करने और जरूरत के अनुसार नए जिले बनाने, मौजूदा जिलों के पुनर्गठन या अन्य प्रशासनिक इकाइयों में बदलाव की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है। इसके लिए आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों, लोगों की पहुंच, प्रशासनिक दक्षता और सरकारी खर्च जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

आयोग को अधिसूचना जारी होने के छह महीने के भीतर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी हैं। रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

CM सुक्खू बोले—जनता की सुविधा प्राथमिकता

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नए जिलों का गठन केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। सरकार चाहती है कि लोगों को अपने जरूरी सरकारी कामों के लिए दूर न जाना पड़े और प्रशासनिक सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध हों।

उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में भौगोलिक परिस्थितियां प्रशासनिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कई क्षेत्रों में लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशासनिक इकाइयों की समीक्षा से यह समझने में मदद मिलेगी कि कहां बदलाव की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आयोग केवल जिलों तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर तहसीलों, उपतहसीलों, विकास खंडों और उपमंडल अधिकारी यानी SDM कार्यालयों के पुनर्गठन पर भी विचार किया जाएगा।

सचिवालय में आयोग के काम के लिए व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने 18 अक्टूबर को शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय के आर्म्सडेल भवन के चौथे चरण के ब्लॉक-1 और ब्लॉक-2 का उद्घाटन किया। इस निर्माण परियोजना पर लगभग नौ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, नए भवन में कार्यालयों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि आयोग के कामकाज के लिए सचिवालय परिसर में कार्यालय की व्यवस्था करने पर भी विचार किया गया है, ताकि समीक्षा का काम आगे बढ़ सके।

सरकार की ओर से गठित आयोग को विभिन्न विभागों से जरूरी दस्तावेज, जनसंख्या संबंधी आंकड़े और प्रशासनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। आयोग संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों और अन्य पक्षों से विचार-विमर्श करके अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन की संभावनाओं को लेकर विपक्षी भाजपा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि नए जिले बनाने से पहले राज्य की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए।

विपक्ष का तर्क है कि नए जिले बनाने से प्रशासनिक भवनों, अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति सहित अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी फैसले से पहले वित्तीय प्रभाव और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों का विस्तृत अध्ययन जरूरी है।

दूसरी ओर, राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों के गठन की अवधारणा को जनता की सुविधा के लिहाज से उपयोगी बताया है। उनका कहना है कि छोटी प्रशासनिक इकाइयों से लोगों के लिए सरकारी काम करवाना आसान हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकार को आयोग की सिफारिशों और अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद लेना है।

54 साल बाद प्रशासनिक पुनर्गठन पर चर्चा

हिमाचल प्रदेश में जिलों के पुनर्गठन का विषय लंबे समय बाद फिर चर्चा में आया है। राज्य में पिछला बड़ा जिला पुनर्गठन एक सितंबर 1972 को हुआ था, जब कांगड़ा जिले का पुनर्गठन कर तीन नए जिले बनाए गए थे। इसके बाद राज्य में जिलों की संख्या नौ से बढ़कर 12 हो गई थी।

अब सरकार द्वारा गठित आयोग के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा रही है। हालांकि, अभी किसी नए जिले के गठन की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल यह प्रक्रिया अध्ययन और सिफारिशों के चरण में है।

आगे क्या होगा?

आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार को यह तय करना होगा कि किन क्षेत्रों में नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही प्रस्तावित बदलावों की लागत, कर्मचारियों की उपलब्धता, कार्यालयों के निर्माण और आम जनता को होने वाले लाभ का आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

यदि प्रशासनिक पुनर्गठन पर फैसला होता है, तो उसका उद्देश्य लोगों को सरकारी सेवाएं नजदीक उपलब्ध कराना और प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना होगा। वहीं, राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए नए कार्यालयों और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च का संतुलन बनाए रखना भी सरकार के सामने चुनौती रहेगी।

निष्कर्ष: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि निर्णय आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर लिया जाएगा। अब सभी की नजर आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर है।

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