औरैया में NHM संविदा कर्मियों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी, नियमितीकरण और समान वेतन की मांग
औरैया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का सीएमओ कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। जनपद के एनएचएम कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन कर नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया। कर्मचारियों ने शासन से उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने और जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
लंबे समय से नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा की मांग
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। कर्मचारियों ने मांग की कि नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर शासन गंभीरता से विचार करे, ताकि उन्हें भी स्थायित्व और सुरक्षा मिल सके।
स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित किए बिना जताया विरोध
एनएचएम कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान अपना कार्य जारी रखा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया। इससे पहले कर्मचारियों ने तीन दिनों तक काली पट्टी बांधकर काम करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के प्रति शासन का ध्यान आकर्षित किया था। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी लंबित मांगों को शासन तक पहुंचाना है।
तीन चरणों में चल रहा विरोध प्रदर्शन
जिला मंत्री अनुराग वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर कर्मचारियों की ओर से तीन चरणों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी क्रम में अयाना, बिधूना और अजीतमल सहित जनपद के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर कर्मचारियों ने तीन दिनों तक काली पट्टी बांधकर कार्य किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
शासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद
एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर समस्याओं का समाधान करेगा। कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा सुरक्षा को अपनी प्रमुख मांग बताते हुए कहा कि लंबे समय से सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
रिपोर्ट: दीपक अवस्थी