Bhadohi Name Change: भदोही अब कहलाएगा संत रविदास नगर भदोही, जानें 32 साल में 5 बार बदले नाम की पूरी कहानी
उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी भदोही की पहचान एक बार फिर बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही करीब तीन दशक में जिले के नाम में पांचवीं बार बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।
CM योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही में 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अब भदोही जिले की पहचान संत रविदास नगर भदोही के नाम से होगी।
योगी आदित्यनाथ ने इस फैसले को संत रविदास की विरासत और सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए कहा कि संत रविदास ने भक्ति और आध्यात्मिक संदेश के जरिए समाज को जोड़ने का काम किया था। उन्होंने संत रविदास के उस आदर्श का भी उल्लेख किया, जिसमें सभी लोगों को समान रूप से अन्न और सम्मान मिलने की कल्पना की गई थी।
1994 में बना था भदोही अलग जिला
भदोही पहले वाराणसी जिले का हिस्सा था। 30 जून 1994 को इसे उत्तर प्रदेश का अलग जिला बनाया गया। उस समय जिले का नाम भदोही ही रखा गया था।
इसके बाद जिले के नाम को लेकर राजनीतिक बदलावों का सिलसिला शुरू हुआ और अगले तीन दशकों में इसकी प्रशासनिक पहचान कई बार बदली।
1997 में बना संत रविदास नगर
मायावती सरकार के कार्यकाल में 4 दिसंबर 1997 को भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया गया। इसके साथ ही जिले की पहचान संत रविदास के नाम से जुड़ गई।
इसके करीब दो साल बाद नाम में एक और बदलाव हुआ।
1999 में नाम हुआ संत रविदास नगर भदोही
12 नवंबर 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया। यानी संत रविदास नगर के साथ भदोही नाम भी जोड़ दिया गया।
2014 में फिर सिर्फ भदोही रह गया नाम
समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान एक बार फिर जिले के नाम में बदलाव हुआ। 6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने संत रविदास नगर नाम हटाकर जिले का नाम फिर भदोही कर दिया। इसके बाद करीब 12 वर्षों तक जिला भदोही के नाम से जाना जाता रहा।
2026 में फिर जुड़ा संत रविदास का नाम
अब 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर जिले का नाम संत रविदास नगर भदोही किए जाने की घोषणा की है। इससे पहले 29 जुलाई 2026 को वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम में भी योगी ने भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की थी।
रविवार की घोषणा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिसूचना भी महत्वपूर्ण होगी।
कालीन उद्योग के लिए दुनिया में मशहूर है भदोही
भदोही की पहचान सिर्फ राजनीतिक या प्रशासनिक नाम से नहीं, बल्कि अपने हस्तनिर्मित कालीन उद्योग से भी है। यह क्षेत्र लंबे समय से कालीन उत्पादन और निर्यात के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने भी जिले की पहचान को कालीन उद्योग से जोड़ते हुए संत रविदास के नाम के साथ नई पहचान देने की बात कही।
विकास परियोजनाओं का भी ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही दौरे के दौरान 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने जिले की भौगोलिक स्थिति और वाराणसी तथा प्रयागराज के बीच इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।
योगी ने क्षेत्र को एक्सप्रेसवे और धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने संत रविदास कुटिया और सीतामढ़ी स्थित सीता समाहित स्थल जैसे धार्मिक स्थलों के विकास की बात कही।
32 साल में पांचवीं बार बदली पहचान
भदोही के नाम में हुए प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
- 30 जून 1994: भदोही अलग जिला बना।
- 4 दिसंबर 1997: नाम बदलकर संत रविदास नगर किया गया।
- 12 नवंबर 1999: नाम हुआ संत रविदास नगर भदोही।
- 6 दिसंबर 2014: नाम फिर भदोही कर दिया गया।
- 4 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर संत रविदास नगर भदोही नाम किए जाने की घोषणा की।
इस तरह भदोही की प्रशासनिक पहचान तीन दशक से अधिक समय में पांच बार बदली है। अब एक बार फिर संत रविदास का नाम जिले की आधिकारिक पहचान से जुड़ने जा रहा है।