यूपी राज्यसभा चुनाव: धनराज नथवानी की एंट्री से 10वीं सीट का गणित दिलचस्प, बीजेपी के सामने भी चुनौती
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सपा ने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बनाया है। दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को अखिलेश यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन आठ सीटों तक पहुंच सकता है, जबकि सपा-कांग्रेस के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है। हालांकि, उम्मीदवारों की अंतिम संख्या और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनावी मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
सपा ने धनराज नथवानी को क्यों उतारा?
धनराज परिमल नथवानी कॉरपोरेट जगत से जुड़े हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर हैं। वह खेल प्रशासन से भी जुड़े रहे हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। सपा द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की जानकारी सामने आते ही यूपी की राजनीति में उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
धनराज नथवानी के पिता परिमल नथवानी राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें एनडीए के समर्थन से उच्च सदन में भेजा गया था। इसी वजह से धनराज की सपा उम्मीदवार के तौर पर एंट्री को राजनीतिक तौर पर भी चर्चा का विषय माना जा रहा है। हालांकि, किसी उम्मीदवार के चयन के पीछे पार्टी की रणनीति के बारे में अंतिम निष्कर्ष केवल आधिकारिक बयान के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
10वीं सीट पर क्यों है नजर?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन आठ राज्यसभा सीटों तक जीतने की स्थिति में बताया जा रहा है, जबकि सपा और उसके सहयोगियों के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है। ऐसे में अगर इससे अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो अतिरिक्त सीट के लिए विधायकों के प्रथम वरीयता मत महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
Aaj Tak की रिपोर्ट में भी 10वीं सीट को लेकर सपा और बीजेपी के बीच अतिरिक्त वोटों के गणित का उल्लेख किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में जिन संभावित क्रॉस वोटिंग या सेंधमारी की चर्चाओं का जिक्र है, वे राजनीतिक अटकलें हैं; उन्हें किसी दल या विधायक के निश्चित रुख के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
बीजेपी ने अभी नहीं खोले सभी पत्ते
30 सितंबर तक बीजेपी की ओर से सभी उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची सामने नहीं आई थी। मीडिया रिपोर्टों में बीजेपी की ओर से आठ उम्मीदवार उतारने की संभावनाओं और कई नामों पर चर्चा का उल्लेख है। भाजपा की अंतिम सूची आने के बाद ही यह साफ होगा कि पार्टी कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारती है और मुकाबला किस रूप में बनता है।
राज्यसभा चुनाव में विधायकों की संख्या और उम्मीदवारों के बीच वोटों का बंटवारा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ सहयोगी दलों के समर्थन पर भी नजर रखते हैं।
सपा के सामने भी वोटों का गणित
सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाकर अपने दो नाम स्पष्ट कर दिए हैं। रामगोपाल यादव लंबे समय से राज्यसभा में सपा का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, जबकि धनराज नथवानी का राजनीतिक दल के उम्मीदवार के तौर पर यह नया प्रवेश है।
मीडिया रिपोर्टों में सपा और बीजेपी दोनों की ओर से संभावित क्रॉस वोटिंग और दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे और चर्चाएं सामने आई हैं। लेकिन मतदान से पहले किसी विधायक के वास्तविक वोट को लेकर निश्चित दावा करना संभव नहीं है।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
इन 10 सीटों में बीजेपी की आठ, सपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल थी। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की राज्यसभा सीट सितंबर में उनके अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद खाली हुई थी, जिससे चुनावी गणित में बदलाव आया है।
नामांकन के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
सपा उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान अखिलेश यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। धनराज नथवानी की उम्मीदवारी के बाद अब बीजेपी की ओर से उम्मीदवारों के नाम और अंतिम रणनीति पर नजर है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूपी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 10 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद और स्पष्ट होगी। मतदान के दौरान विधायकों का संख्या बल, सहयोगी दलों का समर्थन और उम्मीदवारों की संख्या चुनाव के नतीजे तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।